अमूर्त
आकाश रीता है
क्योंकि...
वह झील के दर्पण पर विश्वास करता है.
जबकि...
झील में तैरती मछलियाँ जानती हैं
कि..
बूढ़े सूरज ने
झील में कूदकर आत्महत्या नहीं की है..
इन मछलियों से मैंने सीखा है
विश्वास में पलने का सुख
और..
इंतेज़ार कर रही हूँ
एक बार फिर सुबह होने का...
©डॉ वन्दना गुप्ता
मौलिक