My New Poem ...!!!!
यारो..! हकीकत ज़िन्दगी की
ठीक से जब आप जान गाओगें
खुशी के पल में तो रो पडो़गे
और गमों पलो में भी मुस्कुराओगे
जहाँमें बदलते वक़्त के साथ
गर आप भी खुद ही बदल जाओगे
ख़्यालों के तूफ़ानी भँवर से
साहिलों की डगर तुम भी पाओगे
ग़ुस्सा तो ठीक है पर क्रोध
की मर्यादा पर गर क़ाबू कर पाओगे
तो फिर जीदगीं के अनगिनत
मसलें तो चुटकी में हल कर पाओगे
माना आसान तो नहीं कर पाना
पर ईमँतेहा जीतना कठीन दें पाओगे
उतनी ही अपनी क़ाबिलियत को
प्रकाशित कर परख कर निखार पाओगे
पारस पर घिसकर ही सोना परखा
जाता वनाँ कथीर को तो पूछता कौन हैं
प्रभुजी भी कठोर तपस्या के बाद ही दर्शनकी नज़र बंदेको प्रदान करते हैं.!
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