My New Poem ...!!!
दर्द इतना था ज़िंदगी में अपनी कि
धड़कन भी साथ देने से घबरा गयी..!!
आंखें अपनी बंद थी रब कि याद में
और मौत भी हम से धोखा खा गयी..!!
गमौं के सैलाब सीने में लिए जीएँ जाना
यारों अब आदत-सी अपनी बन गयी.!!
ईतना हम रौए रातों की बेज़ारी में कि
अब तो ऑखें भी सुखँ-सी हो गयी..!!
अब दर्द ही दर बन गया अपने दिल में
बेददँ बेजूबाँ हालात आदत बन गयी.!!
जीएँ तो कोई क्यू कर जीएँ इस बँजर
जहाँमें बस रबकी याद साथी बन गयी।
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