मैं ख़ास हूँ
अपनी उम्मीदों पर जोरदार तमाचें खाकर
अक्सर मैं उदास हो जाता हूँ
उदास होना कोई खास बात नहीं
ये तो साधारण है
पर मैं साधारण नहीं
नजरों के अंत तक छाई निराशाओं मे भी
मैं खुद को समेट कर
किसी कोने मे कभी नहीं बैठता
ख़ून-पसीना एक करके भी, कई दफा हार जाता हूँ
सच कहुँ, अक्सर ही हार जाता हूँ
कभी कभी तो मेरी हार शर्मनाक भी होती है
तब मैं बेसहाय सा हो जाता हूँ, इसमें कुछ खास नहीं
ये तो साधारण है
पर मैं साधारण नहीं
मैं फिर से चल पड़ता हूँ
बात बात पर अपने पैरों के छाले नहीं देखता
मैं ख़ास हूँ
अपनी उम्मीदों पर जोरदार तमाचें खाकर
अक्सर मैं उदास हो जाता हूँ
उदास होना कोई खास बात नहीं
ये तो साधारण है
पर मैं साधारण नहीं
नजरों के अंत तक छाई निराशाओं मे भी
मैं खुद को समेट कर
किसी कोने मे कभी नहीं बैठता
ख़ून-पसीना एक करके भी, कई दफा हार जाता हूँ
सच कहुँ, अक्सर ही हार जाता हूँ
कभी कभी तो मेरी हार शर्मनाक भी होती है
तब मैं बेसहाय सा हो जाता हूँ, इसमें कुछ खास नहीं
ये तो साधारण है
पर मैं साधारण नहीं
मैं फिर से चल पड़ता हूँ
बात बात पर अपने पैरों के छाले नहीं देखता