वो लेकर आए पैगाम ए मोहब्बत और हम समझ ही नहीं पाए दो पल की होती अगर तो वो लफ़जो से सुना देते
वो नज़रों से एहसास दिलाते रहे हम देख कर मुस्करा देते
ऐ खुदा अब उन मुस्कुराती नज़रों को कहां ढूंढू मुझे वो कोई रास्ता तो बता देते
क्या गनीमत है नहीं होता प्यार दोबारा ए रहबर नहीं उनको नज़रों में बसा कर रखता और वो फिर से मुस्कुरा देते