न हिन्दू हूँ मैं, न मुसलमान हूँ मैं,
गौर से देखो सिर्फ इंसान हूँ मैं।
न शरीफ़ हूँ न शराफत है मुझमें,
लोगों की नज़र में बईमान हूँ मैं।
न किताब हूँ मैं न अखबार हूँ मैं,
खुदा का लिखा हुआ कुरान हूँ मैं।
पुरानी यादों को सीने में दफनाया है,
उन यादों का जिंदा श्मसान हूँ मैं।
"पागल" न दुआ है न फरियाद है,
खुदा की इबादत की आज़ान हूँ मैं।
✍?"पागल"✍?