चारों तरफ रंग बिरंगे फूल खिले हुए थे l सूरज की सुनहरी धूप से हर पत्ता हर फूल चांदी और सोने सा चमक रहा था l धीमी धीमी हवा में फूलों की खुशबू बही जा रही थी l वह नटखट भंवरा हर फूल पर मंडरा कर सोमरस का स्वाद लेता तभी तालाब में खिले हुए बड़े-बड़े गुलाबी कमल के फूलों पर उसकी नजर पड़ी, भंवरा बहुत खुश हुआ उसने मन ही मन सोचा आज तो मेरी किस्मत चमक गई और जाकर उनमें से एक फूल फूल पर मंडराने लगा और सोमरस चखने लगा l दिन ढलता जा रहा था भंवरा ईश्वर को धन्यवाद दे रहा था और अपनी किस्मत पर खुश हो रहा था l कभी भंवरा इस फूल पर और कभी उस फूल पर मंडराता l धीरे-धीरे दिन ढलता जा रहा था और शाम हो गई l कमल के फूलों की पंखुड़ियां बंद हो गई भँवरा घबरा गया, उसने निकलने की बहुत कोशिश करी लेकिन सफल नहीं हो पाया l अब शाम ढल चुकी थी और रात आ गई थी भँवरा उदास होकर ईश्वर को याद कर रहा था और खुद को दिलासा दे रहा था कि कोई बात नहीं कल फिर सुबह होगी सुबह होते ही मैं इस फूल से बाहर निकलूंगा फिर से वही जिंदगी जीने को मिलेगी, ये कठिन समय बस कुछ पल और रहेगा l मै इसी बगिया में फूलों का रसपान करूंगा अपने घर वापस जाऊंगा l बस कुछ पल और कट जाएं यही सोचते सोचते रात ढलने लगी न जाने कब भंवरे की आंख लग गई l कुछ घंटों बाद भंवरे को कुछ आहट सुनाई पड़ी भँवरा मन ही मन खुश हो गया कि सुबह होने वाली है, और हवा धीमी धीमी बह रही है l तभी फिर से कमल के फूल हिलने लगे और भंवरा फूल की पंखुड़ियों के अंदर से ऊपर की ओर निहारने लगा कि कब फूल खिलेगा और कब वह आजाद होगा, तभी वहां हाथियों का झुंड आगया, किसी हाथी ने उस कमल के फूल को तोड़ लिया भंवरा घबरा गया उसने फिर से निकलने की बहुत कोशिश करी l चारों तरफ़ सब फूल खिलने लगे थे लेकिन वो फूल मुरझा चुका था और भंवरा फूल के अंदर दम तोड़ चुका था...