सोचते तो है मगर,किसी को बताते नही,
अपने एहसासों को,सब के आगे जताते नही,
हम तो वो हिरे है,जो खुद से अपने दाम बताते नही,
सतानेवालो ने खूब सताया, पर उन्हें हम सताते नही,
खुद जल जाते है, पर औरो को जलाते नही,
पड़ोस में न हो उजाला तो हम, दिया भी जलाते नही,
लोग हमें आजमाते गये, हम किसीको आजमाते नही,
दोस्त इफ्तारी ना कर ले तब तक हम भी कुछ खाते नही,
रईस तो है हम, दिल की दौलत से,कागज़ के पत्ते हम कमाते नही,
चाहे तो एक पल में डूब जाए तुझमे,ना चाहे तो आसमाँ में भी समाते नही....Vora Anand babu....