सुनो
मेरे देश के हिजडे ...नेताओ...
अपना घर भरना बंध करो....
कुछ शिखो हमारे ...जवानो से... किसानो से... मजदुरो से....
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दुःख, आँसू, पीड़ा, बेबसी और गुस्सा..आखिर कब तक?
फिर से घाटी दहल उठी है, नापाकी हथियारों से
मस्तक लहूलुहान हुआ है, गद्दारों के वारो से।
फिर से माँ की गोदी सूनी, विधवाओं का रोना है,
मासूमों को एक बार फिर, वीर पिता को खोना है।
फिर से आँसू धधक उठे है, आंखे भी रुसवाई है
काश्मीर के श्वेत गगन पे काल कालिमा छाई है।
फिर से भारत शर्मिंदा है, शौर्य तिलक के मिटने पर,
भारत माता चीख उठी फिर, रक्त से भूमि पटने पर।
#पुलवामा
#श्रद्धांजलि
*14/02/2019