अब ऐसा मंजर आएगा ..
तू खून के आंसू रोयेगा ..
पल पल हरपल पछतायेगा ..
नामर्दो वाली अपनी करतूतों पे ..
अब जान ले तू ..वक़्त तेरा आ गया है ..
नेस्तो नाबूद होने का ..
अब जान ले तू ..वक़्त तेरा आ गया है ..
खून के आंसू रोने का ..
पानी सिर से बह चुका है ..धीरज घुटने टेक चुकी है ..
संभल सके तो संभाल ले अब ..
भाग सके तो भाग ले अब..
बनकर काल की परछाई हम ..
कफन सिर पर बांध कर हम ..
दफन करने आएंगे ..
खून के आंसू रुलायेंगे ..
याद करले सन 1971 को ,
जब तू घुटने टेक गया था.
याद ना हो तो कोई बात नही ..
वही मंजर अब वापस आएगा ..
हालत तेरी होगी ऐसी ..
कुछ भी समझ न पायेगा तू ..
अब अपने कुकर्मो पे ..
बहुत ज्यादा पछतायेगा तू ..