अब ओर इतिहास के साथ छेड़छानी मत करो।
प्रेम दिवस को नफरत के बीज बोने की कोशिश मत करो।
बिना पढ़े तिथियों को बदलने की कोशिश मत करो।
धर्म, कर्म और जाति भेद बहुत हो गया अब भाषाओं के रंग से नफरत बन्द करो।
जवानी के उमंगों को मारने कि कोशिश बन्द करो।
प्रेम तो आजाद पंछी है पिंजरे में बांधने की कोशिश मत करो।
इश्क में जीने वालों को जवानी में जुदा करने हथकंडे अपनाने बंद करो।
वर्ष के एक दिन को हमदम के संग बिताने वालो को तंग करना बन्द करो।
ये प्यार है दोस्तो इसको ऐसे ही दफन मत करो।
हर लम्हा जीने की कोशिश करो।
बिन इश्क़ मौत के पैगाम को भी स्वीकृत मत करो।
प्रेम दिवस की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
कवि एन आर ओमप्रकाश हमदम।