मालूम है मुझे
तू लौट के आएगा नहीं
फिर भी तेरे एक बार पुकारने
का इंतजार क्यूं है।
कैसे भूलूँ तुझे
भूल नहीं सकती
तेरी वो बातें
मेरी रूह छू गयी
तेरी जिद
मुझे दूर कर गयी।
तुम बताओ
तुम्हीं जैसा ही
दूसरा भी होगा
जो तुम्हीं जैसी
बातें भी करेगा
तुम्हारी जैसी
फरमाइशें भी करेगा
उस छण बताओ
क्या याद नहीं आओगे तुम
क्या रुला नहीं जाओगे तुम।
जब साथ चलना नहीं था
तो राह दिखाए ही क्यूँ
अजनबी थे अजनबी रहते
भीड़ से निकल कर बाहर आये ही क्यूँ।
सोती थी बेखौफ रातों में
मेरी नींद में सपना सजाए ही क्यूँ।
कैद कर लिया खुद में
एक बार तरस खाए ना क्यूँ।