#दिल की बातें
"मणिकर्णिका"
राजा हरिश्चंद्र, महात्मा गांधी,गौतम बुद्ध,लता मंगेशकर के साथ ही मुझे झांसी की रानी का नाम भी मिल चुका है लेकिन आज 'मणिकर्णिका' फिल्म देखकर एहसास हुआ कि झांसी की रानी बनना बहुत ही कठिन और साहस का काम है और भले ही मैं कुछ कर लूँ,खूनखराबा (भले दुश्मन का हो) मेरे वश की बात नहीं।
जिस दौर में महिलाओं से,खासकर विधवाओं से यह उम्मीद की जाती थी कि वो सामाजिक कार्यों से परे रहकर रूढ़ियों का पालन करें,उस दौर में एक महिला का सामाजिक मान्यताओं का विरोध करना ही अपने आप में बहुत बड़े साहस की बात है फिर बाकी उनका पूरा जीवन ही अद्भुत और अदम्य साहस का प्रतीक है।
सालों के बाद आज अपनी माताजी के कहने पर फिल्म देखी और आखिरी दृश्य आते-आते आँखों में आँसू भी आ गए।अच्छी और देखने लायक फिल्म है और हर हिंदुस्तानी को देखना चाहिए और जानना चाहिए कि भारत की आजादी का संघर्ष कितना अधिक कठोर रहा है।सरकार को भी इस फिल्म को तुरंत टैक्स फ्री करना चाहिए।सालों के बाद इस तरह की परिवार जनों के साथ देखने लायक फिल्में बनती है।
कंगना और फिल्म से जुड़े सभी लोग वाकई बधाई के पात्र है।
प्रांजल,
08/02/19,
4.50P