सर्दी का मौसम और तेज ठंड हमेशा से मेरी कमजोरी रहा है पर मैं शुक्रगुज़ार हूँ एक भलीमानुष रश्मि चौधरी जी की जिन्होंने इस कड़कड़ाती ठंड में इस बार मुझे अपना कंबल उधार दिया जिसकी वजह से ठंड के कुछ दिन काट पाई हूँ। ठंड बहुत काटी है ठिठुरते हुए पर ये पहली बार है जब किसी से यूँ कंबल माँगना पड़ा अपने संकोच को छोड़कर और उन्होंने निःसंकोच मुझे अपना एक कंबल दे दिया।
बहुत धन्यवाद जी आपका।
प्रांंजल,
21/12/18,6.22P