ना हों निर्बल न हों निष्फल हों सब निर्मल यहां,
भर दो ऐसी शक्ति मां, हृदय पुकारता तुम्हें।।
सत्य से डरे हुए ,अधर्म पथ पर हैं डटे,
मोह से घिरे हुए, अस्तित्व से परे हटे,
अवलम्ब दो, मां! हृदय पुकारता तुम्हें।।
हम अतल को पा सके ऐसा वरदान दो ।
समझ सके अज्ञान को ज्ञान का प्रकाश दो ।
हटा दो मूर्छा मेरी मां! हृदय पुकारता तुम्हें ।।
स्नेह सिक्त जीव हो , तम त्रय दूर हो ,
सर्व धर्म हों पवित्र, हर्ष मय जीव हो,
अंतस दीप जल उठे ,मां!हृदय पुकारता तुम्हें।।
साधना सफल रहे,अर्चना विफल ना हो ,
धर्म ,दया ,सत्य से जीवन- ज्योति पूर्ण हो ,
चरण में झुके शीश, मां!हृदय पुकारता तुम्हें।।
तारा गुप्ता