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shivpriye

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@shilpanravalgmailcom


part 1....बस कमी ढाई अक्षर की....
प्रतिदिन सूर्योदय के साथ ही कुछ कहानी, कुछ संघर्ष, कुछ इछाए, कुछ यात्रा सभी कहानीया संपूर्ण नही होती सभी संघर्ष जीते नही जाते सभी इछाए प्राप्त नही होती और कुछ यात्रा रहजाति है अधूरी क्यो?
अब आपमेसे कुछ सोचेंगे प्रयास अधूरा रहा कुछ मानेंगे निश्चय दृढ़ नही था कुछ क्रोध करेंगे तो कुछ इस असफलता का बोझ अपने भाग्य के अन्धो पर दलड़ेंगे परंतु इस सबका कारण है केवल एक तत्व की कमी.... कमी है धाय अक्षर की वो है प्रेम कमी है प्रेम की....
प्रेम जो ना सास्त्र की परिभाषा मे मिलेगा ना ही शस्त्रों के बल मिलेगा ना पाताल की गहराई मे नाही आकाश के तारो मे.... तो ए प्रेम है क्या? कैसे पाया जाता है? क्या है मार्ग प्रेम को पाने का?
पाने कोहि प्रेम कहै जग की है ए रित
प्रेम अर्थ संजायेगी शिवप्रीये की ए प्रीत....

part 2 coming ?

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प्रेम का अर्थ: -
भुल स्वीकारना भूल सुधारने का प्रेरम होता है....इस संसार में एसे कितने मनुष्य है जो भूल को स्वीकार करते हैं?
मनुष्य उसीकी भक्ति करता है जिसे वो प्रेम करता है परंतु उसी भक्ति को शक्ति बनाकर अपने आराध्य पर वस पाना चाहता है....
सब भूल गए हैं प्रेम का अर्थ किसको पाना नहीं उसमें खो जाना है....
आत्मा संतुष्टि नहीं आत्मा का विस्तार भक्ति का मूल प्रेम है....
मेंने आपको शब्द से समझाया आप नहीं समझे होंगे क्युकी शब्द सुनकर भूल है और जो दिखता है उसे याद रखते हैं....
इस लिए शिवप्रिया को जाना होगा सबको समजना होगा ईश्वर तक पहोच ने का मार्ग है प्रेम....
हर पीड़ा का अंत है प्रेम, हर शुभ का आरंभ है प्रेम....
ना पास ना दूर, ना मिलना ना बिछड़ ना, ना करीबी ना जुदाई.... एसी है शिवप्रये की प्रीत....
पाने को ही प्रेम करे जगकी है ए रीत,
प्रेम अर्थ समझायेगी शिवप्रेयी की ए प्रीत....?

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सुप्रभात दोस्तो....
आज मे आपको पत्नी के बारे मे बताता हु मुझे Mail आया रात को की मे पत्नी के बारेमे लिखु तो पत्नी क्या है एक कहानी के जरिये बताना चाहता हूं....
....जीवन में पत्नी का सम्मान....
एक बार आदमीं ने पूछा शिवंश तुम अपनी बीवी से इतना दरते क्यो हो? शिवंश कहा साहब मे डरता नहीं हु उनकी कद्रा करता हु उनका सम्मान करता हूँ.... वो आदमी हसा और बोला की ऐसा क्या है उस्मे ना सूरत है ना पढ़ी लिखी है.... शिवंश बोला कोई फ़र्क नही पड़ता साहब की वो कैसे है पर मुझे सबसे प्यारा रिश्ता उन्ही का लगता है.... उस आदमी के मुह से निकल गया जोरु का गुलाम और बोला बाकी सारे रिश्ते कोई माएने नही रखते क्या तेरे लिए? शिवंश ने बहुत ही इम्तिहान से जवाब दिया साहब जी माँ बाबा रिश्तेदर नही होते वो तो भगवान होते है उनसे रिश्ता नही निभाते उनकी पूजा करत हैं.... भाई बहन का रिश्ता जानम जाट से होते हैं.... दोस्ती का रिश्ता भी मतलब से होते हैं और आपका मेरा रिश्ता भी तो जरूरत और पैसो का है साहब और साहब पत्नी बना करीबी के होते हुए भी हमेसा के लिए हमारी हो जाती है अपने सारे रिश्ते को पीछे छोर के हमारी आखरी सांस तक हमारी हो जाती है.... पत्नी एक ही रिश्ता नहीं है वो रिश्तो का भंडार होते हैं....
1. जब वो हमारी सेवा करती है हमारी देख भाल करती है हम दुलार करती है तब वो हमारी माँ जैसी होती है
2. जब वो जमाने से उतार चराव से हमे आगह करती है और मे अपनी सारी कमाई पत्नी के हाथ में रखता हूं मुझे पता होता है वो हर हाल मे घर का भलाही करेगी तब पिता जैसी होती है
3. जब हमारा खयाल करती है हमसे लाद करती है हमारी गलती पर डाटती है हमारे लिए खरीददारी करती है तब हमारी बहन जैसी होती है
4. जब हमसे नखरे करती है नए नए फरमाइश करती है रूठ जाती है तब वो हमारी बेटी जैसी होती है
5. जब हमसे सलाह करती है मसावरः देती है परिवार चलानेकी नसीहत देती है जगदा करती है तब वो हमारी दोस्त जैसी होती है
6. जब वो सारे घर के लेनदेन,खरीददारी,घर चलानेकि जिम्मेदारी उठालेटि है तो वो मलकींन जैसी होती है
7. जब वो सारी दुनिया को यहां तक की अपने बच्चों को छोर के हमारी बाहों आती है तब वो हमारी पत्नी, प्रेमिका, अर्धांगिनी हमारा प्राण आत्मा होती है जो अपना सब कुछ सिर्फ हमारे उपर नोछावर करती है.... तो मे उनकी इज्जत करता हू तो क्या गलकरता हू
वो आदमी शिवंश की बात सुनकर चकित रह गया....
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दोस्तो पत्नी के प्रति अपना नजरिया पवित्र करके तो देखो पूरी जिंदगी पवित्र हो जाएगी बाहर के रिश्ते दिखावे के लिए होते है जब पत्नी पूरी तरह आपकि होती है बस एक छोटेसे परिवर्तन की बात है पत्नी की प्रति अपनी सोच पवित्र बनादो मे पूरी गारंटी के साथ कहता हु जिंदगी में कभी कोई उतार चढ़ाव नहीं आएंगे....

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जीवन के 6 सत्य:
1. कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आप कीतने खुबसूरत है क्यों की लंगूर और गोरिला भी और लोगों को अकर्सीत करते हैं....
2. कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आपका शरीर कितना मजबूत और विशाल है क्योंकि स्मसांन तक आप अपने आप नहीं ले जा सकते....
3. आप कितने भी लंबे क्यों ना हो जाए क्यूंकि आप अपने आने वाले कल को नहीं देख सकते....
4. कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आपकी त्वचा कितनी गोरी है क्यों की अंधेरे में रोशनी की जरूरत पडती ही है....
5. कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आप नही हसेंगे तो सभ्य कहलायेंगे आपपार हसने के लिए दुनिया खड़ी है....
6. कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आप कितने अमीर है कितनी गाडी आपके पास है क्यों की घर के भाथ्रूम तक तो चलकर ही जाना पड़ता है....
अगर कभी भी किसी भी चीज का अहम आ जाए तो कृपिया इन 6 वाक्य को याद कर लेना
मेरा बस केहनेका तत्पर्य इतना है की हम मानव जीव मे भगवान ने बुद्धि दि है इस लिए नही किसी को भी जीव को ठेस पोहचाये बलकी इस लिए दि है की किसी भी जीव को मुसीबत हो परेसानी हो मिलके सुलझा सके ना की किसी भी जीव को उलजनो मे डाले....महादेव आपकि हर मनोकामना पूर्ण करे ?जय महादेव ?

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प्यार क्या है????
प्यार बहुत ही पवीट्र बंधन है....इसका ए मतलब नहीं की बंधन है तो बंधन बांधना है....अगर दिल में उतारलो तो प्यार भगवान है और दिमाग मे रखोंगे तो प्यार बहुत ही बदा वहम है....प्यार रुह से हुआ बहुत ही पवित्र बंधन में बंद जाएंगे आप और जिस्म से हुआ तो पास हो कर भी वहम ही साथ होगा....ईज्ज्त दो प्यार को.... क्या कृष्ण ने राधा को कभी गली दि थी?
क्या कृष्ण ने राधा को कभी होटल बुलाया था? अपने प्यार के लिए अपनी सोच पवित्र करलो अपना प्यार अ पनेआप पवित्र हो जायेगा.... प्यार का मतलब शादी नही होता जैसे राधा कृष्ण प्यार पवित्र था और राधा ही रुक्मणी बन के साम ने आये और रुक्मणी कृष्ण का शादी हुई.... बस अपने प्यार की पवित्रता बनाये रखना भगवान को खुद आएंगे दो प्यार करने वाले कमिंलायेंगे....
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मे अपनी ही बात करता हु मे भी प्रिया नाम की लडकी को बहुत प्यार करता हूँ
मेरा नाम शिवंश है और जीसे प्यार करता हूँ उनका नाम प्रिया हम दोनो कभी एक दूजे मिले नही पूरा एक साल हो गया है और पता नहीं कितने साल नही मिलेंगे पर मेरे प्यार पे मुझे बहुत ही ज्यादा भरोसा है मेरे बीवी प्रिया ही होंगे और मे अपनी बीवी प्रिया के साथ फोटो भी upload करुंगा वादा.... मेरा नाम शिवंश और मेरे बीवी का प्रिया दोनो का नाम मिलता है तो शिवप्रिया यानि की शिव के सबसे प्यारे और मुझे भी बहुत प्यारे है मेरे प्रिया?

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