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सब्रका के ले ना ओर इम्तिहान। टूट चुका है एक ओर इंतकाम। मंजिल को पाया कोसों दूर, मुसाफ़िर बनकर भटक रहा दर दर। तनहाई का ए आलम, कर बैठे खुदको रुसवा। या मेरे खुदा ना कर मुझे ओर लज्जित। हे मेरे मुल्तानी कर दे थोड़ी रेहम। - Kamlesh Parmar
दर्द की ए कहानी है बड़ी सुहानी है। दर्द में खुद सहता रहा, हुवे ना कोई मेरा। करते रहे सब अनदेखा, हुआ में खुद चकनाचूर। उम्मीद को दामन छोड़ दिया, सह ना सका और ग़म। झूठा ही सही देता कोई दिलासा, तो कुछ देर तो होता मन को सुकून। - Kamlesh Parmar
हर रंग का एक खाश एहसास है, हर रंग से उजागर हो आपका दर्पण, रंगों से भर जाये आपका दामन, रंगबिरंगीब खुशियों से भर जाये आपका जीवन। होली दहन के इस पावन अवसर की आप सबको ढेर सारी शुभ कामना। Happy Holi to all of you !! - Kamlesh Parmar
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