मैं और मेरे अह्सास
मीठे बोल
आज प्यारे मीठे बोल में एक अफ़साना था l
अपनों को प्यार की भाषा को समझाना था ll
खुदा ने भेजा है तो वक्त जाया नहीं करना था l
कायनात में आए थे कुछ करके जाना था ll
इस जन्म में अच्छे कर्मों को जमा करके सखी l
पिछले जनमों का भी हिसाब निपटाना था ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह