मैं और मेरे अह्सास
सोचना क्या
सोचना क्या जो भी होगा सब अच्छा ही होगा l
जो तुने सोचा है वह रास्ता सच्चा ही होगा ll
दर्द का एहसास भी क्यूँ हो नहीं सकता कि l
प्यार तूझे जब हुआ होगा कच्चा ही होगा ll
बात सब बचकानी सी लगती है क्यूँकी वो l
सोचने के लिए समझने को बच्चा ही होगा ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह