लगी हल्के सी ठोकर और तू घबर गया
अभी तो है मीलों लंबा सफर और
तू हवा के एक झोंके से ही लड़खड़ा गया।
बातों से भी क्या कभी हालात बदलते हैं
अपनी धुन के पक्के ही किस्मत के लेख पलटते हैं।
मत छोड़ना उम्मीद ,मत होना तू हताश
जो नहीं मिला उसे सोच होता तू क्यों उदास!
सब्र को बना साथी और खुद पर रख तू विश्वास
जो होगा तेरा वह एक दिन खुद आएगा तेरे पास ।
एक राह बंद हुई तो क्या दस राहें नई खुलेंगी
तेरी जिद के आगे हार भी एक दिन हार मानकर झुकेगी।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati