ज्ञान बड़ा है पैसा ?कहानी: खाली जेब और भरा दिमाग
एक गाँव में दो दोस्त रहते थे—
मोहन और सुरेश।
मोहन के पिता बहुत अमीर थे। घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी।
मोहन को लगता था—
“पैसा है तो सब कुछ है, पढ़ाई-लिखाई किस काम की?”
दूसरी ओर सुरेश गरीब परिवार से था।
उसके पास पैसा नहीं था, लेकिन सीखने की भूख थी।
वह किताबें पढ़ता, लोगों से सवाल पूछता और हर अनुभव से कुछ न कुछ सीख लेता।
समय बीतता गया…
एक दिन गाँव में बाढ़ आ गई।
मोहन का सारा पैसा, खेत और सामान बह गया।
वह टूट गया—
“अब मैं क्या करूँगा?”
उसी समय सुरेश ने हालात को समझा।
उसने अपने ज्ञान से लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचाया,
खेती के नए तरीके अपनाए
और छोटा-सा काम शुरू किया।
कुछ ही सालों में सुरेश सफल हो गया।
लोग उसकी सलाह लेने आने लगे।
वहीं मोहन सुरेश के पास मदद माँगने पहुँचा।
मोहन ने पूछा—
“तुम्हारे पास तो पहले कुछ भी नहीं था, फिर तुम इतना आगे कैसे निकल गए?”
सुरेश मुस्कुराया और बोला—
“पैसा खो जाए तो कुछ नहीं,
लेकिन अगर ज्ञान हो तो सब कुछ फिर से बनाया जा सकता है।”
मोहन की आँखें खुल गईं।
उसे समझ आ गया कि
पैसा साथ छोड़ सकता है,
पर ज्ञान जीवन भर साथ चलता है।
सीख:
👉 पैसा साधन है,
👉 ज्ञान शक्ति है,
👉 और शक्ति से साधन पैदा होते हैं।🔥 एक लाइन में बात:
पैसा जेब में रहता है,
ज्ञान दिमाग में —
और दिमाग जेब को भर देता है।