मुझे समझ नहीं आता…
हर बार बदनाम सिर्फ बहू ही क्यों होती है?
अगर बहू जवाब दे दे,
तो कहा जाता है – बदतमीज़ है, ज़ुबान चलाती है,
सेवा नहीं करती।
लेकिन कोई ये नहीं सोचता कि
एक अकेली लड़की
पूरे ससुराल को कैसे परेशान कर सकती है?
वो तो पढ़-लिख कर,
अपना घर छोड़कर,
सिर्फ एक नया घर बसाने आती है…
किसी को तोड़ने नहीं।
क्या वो अकेली इतनी ताक़तवर होती है
कि सबको बिगाड़ दे?
या फिर सच ये है कि
जब हद से ज़्यादा दबाया जाता है,
तो खामोशी टूट जाती है…
और उसी टूटन को
“बदतमीज़ी” का नाम दे दिया जाता है।
- archana