कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, खामोशी से टूट जाते हैं,
हम हर बार समझते रहे, और लोग हर बार हमें गलत समझ जाते हैं।
दिल ने चाहा था बहुत कुछ कहना, मगर आवाज़ आँखों तक ही सिमट गई,
जिसे अपना मानकर रोया करते थे, वही हमें देखकर मुस्कुरा गए।
अब शिकवा भी नहीं, न कोई शिकायत बाकी है,
बस एक थकान सी है दिल में… कि हमने सच्चा होकर भी क्या पाया
- kajal jha