एक शाम....
किसी ईक रोझ शाम अगर तुम मिलने आओ मुझे,
और, अगर न मिलु तुम्हे, तो क्या तुम ढुढ़ पाओगे?
बताओ, कहाँ कहाँ पता पुछोगे मेरा?राह देखोगे या?
फिर, मुझे भूल जाओगे? या फिर भूल समझाओगे?
एक बार हस पडो मेरी याद में,या तार तार हो जाओगे
में, तो पागल सी तितली जैसी,तुम सयाने बन जाओगे?
एक शाम लिखी हे नाजुक सी,तुम शाम को लेके आओगे!
हीना रामकबीर हरीयाणी
- Heena Ramkabir Hariyani