जहर देंगे वो दवाइयाँ देंगे, सच होकर भी झूठ की गवाहियाँ देंगे।
दिल के जख्मों पे नमक छिड़क कर, फिर हमें सब्र की दुआएँ देंगे।
ख़ुद ही डूबे हैं अपने दरिया में, और हमें तैरने की सीख देंगे।
झूठ को सजाकर किताबों में, लफ्जो के हक़ की सीमाएं देंगे।
जो नहीं देख पाए खुद का चेहरा, वो हमें शिशों में अक्स की राह देंगे।
कल वही लोग जो देते थे जख्म हमें, हमारी जीत पे दुआओं का इस्तक़बाल देंगे।