जब भी तुम घर में रहती हो,
सारा दिन किच-किच करती हो....
...करती हो.....तुम करती हो..😂
भिखमंगों सा हाल हुआ,
खच्चर जैसे चाल हुआ।
बैलगाड़ी कर बैठीं,
जीना भी मुहाल हुआ।
सुख-शांति की माला जपता रहा,
जो कहती रही,वही करता रहा।
फिर भी मनमानी करती हो......
...करती हो.....तुम करती हो😂
कोप-भवन में घुस जाओ,
टाट बिछाकर अड़ जाओ।
अपना था कभी इक सपना,
हो संग तेरे नाम अपना।
सारे वादे तुम भूल गयी,
है झगड़ों के मूल यही।
संग तेरे जीना मरना...
...कहती हो..कहती हो......नहीं करती हो🤣
तुम बस कहती हो...........
क्रमशः.......✍️
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#सनातनी_जितेंद्र मन