आंखो से ओझल रहेता है फिर भी रोज मेरा देश... मेरा गाऊ...मेरा घर...मुझे बहोत याद आता है कोन कहेता है कि अपने देश से दूर जाने से वो याद नहीं आता...ओ बेदर्दी थोड़ा संभल जा हर बात कही नहीं जाती समझी जाती है...
मेरी संस्कृति...मेरी मातृभाषा...हरपल मुझे मेरे वतन से नजदीक रखती है...
वो आंखो से ओझल है फिर भी मेरे दिल के करीब है...क्युकी दिल है हिंदुस्तान..