इनसान है तो रीश्ते महोबत भाई चारा दोस्ती आशीयाना ओर जींदगी ही चाहेगा और यही ही करेगा, इसके लीये ही ये पेदा हुआ है,बस जरुरी ये है की कीसीका बुरा न हो कोई परेशान न हो, हैवान ही होगा जो इसकी वीरुध्ध वीचार धारा अपनायेगा,
कूया गलत बात हुई जीसने आपपे ट्रब्ट रखके कोइ बात कह दी, आपको इसके काबील समजा आपके लीए बडी बात नही, आप को सही या उचीत नही लगता तो उसे कहने का तरीका आप क्यो गलत इसतमाल कर रहे हो? एक बार प्यारसे बात करके देखो , कीसीका मन भी रह जाएगा ओर शम्स्या भी हल हो जाएगी, जीयो और जीने दो
Raajhemant