एक अकेला तारा
रात मे चमक रहा ,
एक अकेला तारा दमक रहा ।
सबसे दूर, मगर अलग है उसका नूर
फिर भी है उसमे अनोखा गरूर ।
ना आस करे ,ना किसी को साथ लाने का प्रयास करे,
चाँद की छाया मे भी वो मुस्कराए,
अपनी रोशनी से खुद को सज़ाए ।
"है एक नन्हा सितारा,फिर भी नही चाहता
कोई पुकारे इसे बेचारा "
दिन- रात हूं मै सोचती यारा,
क्यो है वो इतना अकेला तारा ?
क्या उसको भी है कुछ बडा पाने कि आस ?
इसलिए नही रखता वो किसी को अपने
आस- पास ?
खोज रहा है अपने अंदर की आग ,
और बना रहा है नए माग॔ ?
या बस हमे राह दिखाने आया
चुपचाप अपना फर्ज निभाया ।
हम भी बने वैसे सितारे
जो लगाए आत्मविश्वास के नारे ।
जग मे रोशनी और हिम्मत बाॅटे
चलो बन जाए हम
"एक अकेला तारा "
जो देगा सबको सहारा ।
written
by.
Neeti