शनि निंदा स्तुति
रे निर्दयी, रे क्रूर दृष्टि, तू न्याय का कैसा ढोंग रचाए?
दीन-हीन को कुचल रहा, और पापियों को मौज दिखाए।
कौए जैसा रूप तेरा, और मन में कालिख छाई है,
मेरी हँसती-खेलती दुनिया, तूने नरक बनाई है।
चलता तू कछुए की चाल, पर दुख देने में बड़ा तेज है,
मेरे पसीने की कमाई पर, बिछाता काँटों की सेज है।
क्या बिगाड़ा था तेरा मैंने, जो इतनी कठोर सजा दी?
मेरे सपनों की अर्थी तूने, अपनों के हाथों सजवा दी।
ले दे ले भर-भर गालियाँ, जो तेरे मुख पर मैं मारूँ,
तेरी टेढ़ी नज़र के आगे, अब मैं कभी न हारूँ।
उच्च का होकर बैठा है, पर कर्म तेरे सब नीच हैं,
इंसानियत और पत्थर में, बस तू ही खड़ा बीच है।
अब छोड़ पीछा मेरा, या फिर काल बनकर आ जा,
या तो मेरा भाग्य बदल, या मेरा अस्तित्व खा जा।
थक गया हूँ मैं लड़ते-लड़ते, अब धैर्य मेरा टूटा है,
तुझ जैसे निर्दयी देव से, अब मेरा नाता छूटा है।
Adv. आशीष जैन
7055301422
इसके लाभ बहुत है शनि की निंदा जरूर करें जब शनि आपको परेशान करता है तब