मैं और मेरे अह्सास
चाँदनी रात
चाँदनी रात में मिलने की बात करता हैँ l
दिल पर कहर ढहने की बात करता हैँ ll
नीले गगन तले झिलमिलाते नजारों में l
तन में ताजगी भरने की बात करता हैँ ll
मन्द मन्द हवाओ के झोंके के साथ ही l
हुस्न का चैन हरने की बात करता हैँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह