शहर में रात नहीं होती
बिजली के गोले,
समूह में इकट्ठा होकर
सूरज बन जाते हैं
और रात को छिपा लेते हैं।
गाँव में रात और दिन
दोनों होते है समय पर,
वहाँ तारे सूरज का
विकल्प बन जाते हैं।
अब धरती भी बट गई है
दो-दो हिस्सों में,
एक धरती प्रकृति के साथ
और एक प्रकृति के विरुद्ध।