ख़ामोश-सी ख़ूबसूरत शाम
शाम जब अपनी नर्म चादर आसमान पर बिछाती है, तो दिल भी सुकून की गहराइयों में उतर जाता है। सूरज की आख़िरी किरणें जैसे अलविदा कहती हों और हवा में एक मीठी-सी उदासी घुल जाती है। इस वक़्त हर चीज़ ठहर-सी जाती है, शोर भी ख़ामोशी से बातें करने लगता है।
एक ख़ूबसूरत शाम, बीते लम्हों की याद दिलाती है और आने वाले ख़्वाबों को सहलाती है। चाय की चुस्की, ठंडी हवा और अपनों की मुस्कान—यही तो शाम की असली ज़ीनत है। इस पल में अगर दिल को सुकून मिल जाए, तो समझो शाम मुकम्मल हो गई।