The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
Oye sun... ek baat bataau tujhe ? tu na, bahuuuut special hai mere liye, tere bina meri zindgi bilkul pani km chai hai jese... mujhe pta hai me tujhe bahut irritate karti hu, pr sch khu to hk smjh k krti hu, tujhe apna manti hu, & tujh pr bharosa krti hu. me chaahe jo bhi kru, jahaa bhi rhu, mere sth kuch bhi accha hota hai, ya khraab hota h, mere dimag me sbse phle tera hi khyaal aata hai, aur tujhe hi btana accha lgta hai... yrr bs me itna janti hu ki kuch rishte bahut gahre hote hai, or unki gahrai kisi bhi naam se ya tag se naapi nhi ja skti... tera mujhe nhi pta, pr mere liye tu sbse upar hai or hmesha rehega, mera jigar ka tukda hai tu you mean a lot to me...❤️
* फासले * कहना तो बहुत कुछ है आज भी तुमसे, पर अब वो बात नहीं, पहले दूर होकर भी थे पास हम, अब पास होकर भी वो जज़्बात नहीं। मैं बात करूँ तो बात होती है, वरना खामोशी का सन्नाटा है, मेरी हर कोशिश के पीछे, बस तुम्हारा ही तो वास्ता है। सुबह से शाम और शाम से रात ढल जाती है, मेरी बेकरारी तुम्हारी बेरुखी में ही पल जाती है। मेरा तो दिन ही नहीं ढलता, बिना तुमसे एक बार बात किए, और तुम हो कि तुम्हें याद भी नहीं, कि गुज़रे हैं कितने दिन साथ लिए। शायद अब फर्क नहीं पड़ता तुम्हें, कि मैं हूँ या नहीं हूँ, मैं पागल आज भी यही सोचती हूँ कि तुम्हारे लिए खास हूँ या नहीं हूँ? ये कैसा मुकाम है, जहाँ मैं खुद को ही खो रही हूँ, तुम्हारे पास होकर भी, मैं हर पल बस रो रही हूँ। क्यों तुम बदल गए? क्यों ये एहसास बदल गया? क्यों वो प्यारा सा रिश्ता, एक मायूसी में बदल गया? सवाल बहुत हैं दिल में, पर अब जवाब नहीं माँगना, तुमसे तुम्हारी ही मर्ज़ी का, कोई हिसाब नहीं माँगना। बस थक गई हूँ अब, खुद को ही सही साबित करते-करते, बिखर गई हूँ मैं, तुम्हारे इंतज़ार में, घुटते-घुटते। अब तुम खुश हो अपनी दुनिया में, तो मुझे भी संभलने दो, जो जगह थी दिल में तुम्हारी, अब उसे खाली ही रहने दो। 🥀💔😔✨ (प्रिया.....)
मर्यादा और मुक्ति ________________ पुरुष जब निकला घर की देहरी से, तो दुनिया ने उसे 'बुद्ध' कह दिया। मोह-माया का बंधन उसने तोड़ा, और उसे 'ज्ञान का पथिक' कह दिया। पर स्त्री जब निकली उन राहों पर, तो मर्यादाओं का घेरा खींच दिया गया। उसे अग्निपरीक्षा की बेड़ियों में रखकर, 'सीता' का सतीत्व नाम दे दिया गया। क्यों नहीं बनी वो बुद्ध की तरह स्वतंत्र? क्यों उसे त्याग की एक मूर्ति माना गया? पुरुष की 'खोज' को मिला सम्मान, स्त्री के 'संघर्ष' को तो केवल कर्त्तव्य माना गया। इतिहास ने तराजू रखे थे अलग-अलग, पुरुष के लिए 'वैराग्य' और स्त्री के लिए 'त्याग'। अक्का महादेवी और मीरा की रूहें कहती हैं, कि ज्ञान का नहीं होता कोई भी लिंग या राग। वो सीता नहीं, वो स्वयं में ही बुद्ध है, जो अपनी शर्तों पर जीना जानती है। बेड़ियों को तोड़कर जो निकले घर से, वो तो खुद अपनी ही ज्योति पहचानती है। ⚖️🔥🕯️🥀📜✨🕊️👣🖤🥀⚖️
मैं चाहूँ तो अपनी मोहब्बत पर एक किताब लिख दूँ, खुद को एक कांटा और तुझे खिला गुलाब लिख दूँ। और तू जो अपनी मोहब्बत को एहसान बताता है, मैं चाहूँ तो तुझे भी मोहब्बत का बुरा ख्वाब लिख दूँ। 🥀💔 - Priya Chaudhary
सब मोह-माया का बंधन है, ये दुनिया एक छलावा है, 🕸️ मैंने हर रिश्ते में सिर्फ धोखा और खालीपन ही पाया है। 💔🥀 अब कोई ख्वाहिश नहीं बची, न कोई पाने की आरज़ू है, 🌬️ महादेव, अब तो बस तेरी शरण में मिलने वाली वो शांति ही रूबरू है। 🙏✨ दुनिया के इन शोर से दूर, एक खामोश ठिकाना चाहिए, 🏔️🧘♀️ रिश्तों के इन झूठे धागों से, अब मुझे आज़ाद हो जाना चाहिए। ⛓️🕊️ सब छोड़कर, सब तोड़कर, बस तेरी राहों पर चल पड़ूँ, 👣🔱 मैं भी वैरागी बनकर, तेरे ध्यान में खुद को ढाल लूँ। 🕉️🕯️ न महल की चाहत है, न अपनों के दिए गम का कोई रोना है, 🏚️💧 अब तो बस राख लपेट कर, तेरे चरणों में ही खोना है। ✨🌀 ये दुनिया भी अपनी है, ये रूतबा भी उनका ही है, 🌍🎭 मैं तो बस तेरी होकर, तेरे संन्यास की राह पर चलना चाहती हूँ महादेव। 📿🙌🔱 :-प्रिया चौधरी
अब न कोई शिकायत है, न तुमसे कोई उम्मीद बची है, मेरी रूह ने अब तुम्हारे ख़यालों से भी, दूरी चुन ली है। तुम बेवफा नहीं थे, शायद बस मेरी पसंद में ही गलती थी, पर उस गलती को सुधारने की, अब मुझमें हिम्मत जागी है। मैं उस आईने को अब तोड़ दूँगी, जिसमें तुम्हारा अक्स दिखता है, उस रास्ते पर अब नहीं चलूँगी, जहाँ मेरा दिल ही सिसकता है। मैंने खुद को बहुत छोटा किया, तुम्हारी दुनिया में फिट होने के लिए, अब मैं उतनी बड़ी हूँ, कि मुझे तुम्हारे साये की ज़रूरत नहीं है। जाओ, अब तुम आज़ाद हो, और मैं अपनी मंज़िल पर निकल पड़ी हूँ, बीते हुए कल की राख को छोड़कर, मैं एक नई सुबह पर खड़ी हूँ। तुम्हें नफरत नहीं, बस अब एक धुंधली याद बनाना है, मुझे खुद से फिर से मिलना है, खुद को ही गले लगाना है। ( priya Chaudhary)
वो अब बिजी हो गया है अपनी नई दुनिया सजाने में, और मैं अब भी उलझी हूँ, उसे अपनी यादों से हटाने में। उसे वक्त नहीं है अब, मेरी खामोशियों को सुनने का, मेरे उन तमाम सवालों का, जो अब भी दबे हैं ज़माने में। कभी घंटों जो मेरी आहट पर ठहर जाया करता था, आज उसे खबर भी नहीं, कि मैं मर रही हूँ या जी रही हूँ। वो तो अपनी कामयाबी की बुलंदियों पर खुश है बहुत, और मैं... मैं अब भी बस अपनी ही तन्हाई को पी रही हूँ। मजबूत बनना चाहती हूँ, कि अब उसे याद न करूँ, पर वो 'बिजी' है—ये ख्याल मुझे और भी तोड़ देता है। वो तो भूल चुका है मुझे, शायद एक पुराना पन्ना समझकर, और ये दिल है कि आज भी, उसकी हर एक झूठी उम्मीद को जोड़ देता है। कितनी अजीब है न ये मोहब्बत की आखिरी सीढ़ी? कि उसे परवाह भी नहीं, और मैं मर रही हूँ ये सोचकर, कि उसके पास अब मेरे लिए वक्त क्यों नहीं है? अब खुद को आईने में देखना भी एक सजा सा लगता है, क्योंकि मेरी आँखों में अब, उसके 'बिजी' होने का मातम दिखता है। शायद अब वक्त आ गया है, कि मैं भी 'बिजी' हो जाऊं, खुद को समेटने में, खुद को वापस पाने में, और उसे हमेशा के लिए, उसकी अपनी 'बिजी' दुनिया में छोड़ आने में। — प्रिया चौधरी 🥀🩹🦋✨
बिछड़ गए तो ये दिल 'उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं 😇💔 नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं🥺❤️
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Nichetech.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser