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नशीब......🗒️✍️❣️
साथ मराठी, वाट मराठी..... अभिमानाची लाट मराठी...... तुकोबाची अद्भुत वाणी, ज्ञानोबाचे लेख मराठी......!✍️
मिल गया होता....✍️ मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता.... अमावस के चांद को उसका सितारा मिल गया होता...... अगर एक लफ्ज़ छुप जाता छूपके से, मुझे मेरे दिल का तराना मिल गया होता...... उस दिन तो नैय्या कुछ यूंही डूबी.... समुंदर चारों दिशाओं में खोया होता...... अगर तूफान नहीं आता , तो शायद किनारा मुझे मिल गया होता....... क्या कहे काटो को, फूल भी अब काटने लगे.... बच्चा था,ठीक था....लेकिन जवानी में भी कोई धूल चाटने लगे..... अच्छा हुआ हवा के साथ धूल भी उड़ गई..... वरना उसकोही, सोने की चमक समझके बैठा होता, अफसोस फिर भी आँखें करती है.... क्योंकि नजर को कोई नजारा मिल गया होता......! इसलिए तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता.... अगर तूफान नहीं आता, किनारा मिल गया होता.......!!
after fighting with her ...😁 आग पेटली उरात, चंद्र जणू ढासळला... नको नको म्हणताही दोघांत भूकंप दाटला... युद्ध झाले शब्दांचे, भाव सारे उसळले... खेळता खेळ नात्याचा दोन्ही पक्षी हे रुसले... असा कसा वणवा पेटला हिमाच्या या गावात? लागले निशाण खोल नयनांच्या त्या नेमात...!
सिर्फ तुम....❣️✍️ तुम्हे कहूँ तो लब्ज़ हो तुम, तुम्हें पढ़ूँ तो किताब हो तुम। तुम्हें सुनूँ तो दिल की धड़कन, तुम्हें लिखूँ तो मेरी कलम हो तुम। लोगों की होंगी अपनी-अपनी प्रेम कहानियाँ हज़ार, मेरे जीवन की हर साँस में बस एक ही इंतज़ार हो तुम। ख़ुदा भी तुम, दुआ भी तुम, मेरे हर ख़्वाब का आधार हो तुम। सबसे अच्छा मेरा यार हो तुम, फिर भी अधूरी-सी एक बात हो तुम। ख़ुदा भी तुम, जीवन भी तुम, सबसे प्यारा मेरा यार हो तुम। दुनिया पढ़े चाहे लाख किताबें, मेरी तो ख़ुद की शायरी हो तुम। जो दूर रहकर भी पास लगे, वो यादों की वो बेकरारी हो तुम। मुस्कान में छुपा दर्द और आँखों की नमी हो तुम। सब कुछ होकर भी जो ना मिले, मेरी सबसे बड़ी कमी हो तुम…
🗒️✍️❣️
रॉंह.... राह पर चलते चलते कुछ अजनबी हसीन मिल गए...... ठोकर खाकर भी आगे थे ऐसे भी कुछ नकाब मिल गए.... सोचा,की खैर अब आया ही हूँ तो आगे निकल जाऊ..... तरह तरह के लोग होते है दुनिया में.. उनसे थोड़ा अब मुकर ही जाऊ.... सवाल उठा था मन में, मैं तो आगे जाने वाल था.....? तभी कोई फंदा गले में आके फंसा.. वरना जवाब को छूकर बस लौटने ही वाल था..... कुदरत ने भी क्या खेल रचा, जैसे मौत के कुएं से लौट बचा.... मंजिल की तलाश में थे हम, रास्ता तो हमारे लिए अपने आप सजा......!
रेख हातावरची....
कोण आहेस तू...? जरा विचार तुझ्या प्रेमाला... नजरेत बघ थोडं, दिसेल च कुठेतरी तुझ्या श्वासाला..... हृदयाची धडधड नि जीवाची आस आहेस तू ..... रखरखत्या उन्हात छायेचा ध्यास आहेस तू...... कवितेचा शेवट काय, सुरवातीला ही आहेस तू.... जशी सकाळी ही आणि सूर्याच्या मावळतीला ही आहेस तू..... या धडधडत्या हृदयाची आस आहेस तू.... मंद मंद धावणारा श्वासातला श्वास आहेस तू.... समुद्राच्या लाटापरी उसळते हृदय.... किनाऱ्यावर येऊन मिळणारी वाट आहेस तू.....! सुगंधपरी दरवळणारा आनंद आहेस तू..... कधी न संपणारा छंद आहेस तू..... गाण्याचे ते फक्त निमित्त... ओठांवर गुणगुणणारे गीत आहेस तू......
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