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गरीबी, गरीबों को मिटाने से नहीं, बल्कि उन्हें समानता की मुख्य धार में लाने से खत्म होती है।” ये विचार ही स्वतंत्रता आंदोलन का मूल था। इसके लिए ही कई समाज सुधार आंदोलन हुए,साथ ही कई समाज सुधारकों ने इसे अपना मूल लक्ष्य बनाया। इसी के फलस्वरूप हमे संविधान में आर्टिकल 14 में विधि के समक्ष क्षमता और विधि का समान संरक्षण जैसे प्रावधान प्राप्त होए।
अछूतपन (Untouchability) लोगों में नहीं, बल्कि उनके व्यवहार में निहित है” - Kiran
सुंदरता क्या है… नैनों की भूख है या, या समाज की बनाई कोई तस्वीर, जो हर चेहरे पर एक जैसा नाप ढूंढती है? कभी वो आँखों में ठहर जाती है, एक मुस्कान की हल्की सी लकीर बनकर, तो कभी शब्दों में छलकती है, किसी के सच्चे व्यवहार की तरह। समाज ने बाँधना चाहा उसे, रंगों, आकारों और मापों में, पर वो तो बहती रही चुपचाप, हर दिल की अपनी किताबों में। नैनों को जो भा जाए, वो पलभर की छाया है, भीतर जो चमक उठे, वही असली माया है। क्योंकि चेहरों की चमक ढल जाती है एक दिन, पर आत्मा की रोशनी कभी कम नहीं होती। तो सुंदरता… न तो केवल नैनों की भूख है, न ही सिर्फ समाज की बनावट, वो तो एक एहसास है—
ख्वाबों में रोज तुम आती जरूर हो , लेकिन केवल मेरी गलती याद दिलाने। - Kiran
कहते रहे हमेशा तुम, भरोसा करो मेरा , में तुम्हारा अपना हूं। कैसे करू भरोसा उस पर, जिसने धोखे के अलावा, कोई तोहफा ही नहीं दिया। - Kiran
पहुंची तेरे द्वार बड़ी उम्मीद से, सोचकर आई थी कहूंगी बहुत कुछ, पर जैसे ही सूरत सामने आई तेरी, सब कुछ भूल गई मैं उस पल में। न रहा कोई सवाल, न कोई शिकायत, बस आँखों में ठहर गए कुछ आंसू, और दिल ने चुपचाप कह दिया— तू ही था, तू ही है, बस तू ही तू।
कड़वा है पर सत प्रतिशत सत्य है। आज की मौज में मैं टालूँ काम कल पर, कहती रहती हूँ खुद से— आज नहीं… कल। लम्हों को यूँ ही खोकर, वक्त को हल्का समझती हूँ, हर अधूरे काम के पीछे बस एक बहाना रखती हूँ। एक समय ऐसा आएगा, जब तरसूँगी सुकून से जीने को, तब वक्त भी मुस्कुराकर कहेगा— आज नहीं… कल।
तू कल की चिंता में आज क्यों बिगाड़े, तू तो ईश्वर का बंदा है रख विश्वास स्वयं पर। तू आगे बढ़, हिम्मत कर, डर को पीछे छोड़, हर मुश्किल रास्ते में ही मंज़िल का है मोड़। मेहनत तेरी रंग लाएगी, बस खुद पर ऐतबार कर, सफलता तेरे कदम चूमेगी, तू एक बार प्रयास कर।✨✨
“तंगी में ही तो असली पहचान बनती है, सपनों की उड़ान भी यहीं से जनती है। हालात चाहे जितने भी क्यों न हों कठोर, हिम्मत रखो… यही रात सुबह में बदलती है।” .... - Kiran
वो आके मुझे सुंदरता से, मैं देखूं उसकी सौम्यता। वो निहारे मेरा रूप, मैं देखूं उसकी शालीनता। वो ध्यान दे मेरे वजन पर, मैं देखूं बस उसे… नापे वो बाहरी चेहरों को, मैं छू लूं उसकी आत्मा के रस को। वो बोले दुनिया की बातें, मैं सुनूं उसकी खामोशी, वो ढूंढे मुझमें कमियां, मैं ढूंढूं उसमें रोशनी। क्योंकि उसे पसंद है सूरत, और मुझे उसकी सीरत। ❤️
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