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@antima4823


कौन होते है वो लोग जो पढ़ाई ओर जिंदगी के सारे मजे ले लेते है।


मैं परीक्षाओं के समय बिन ब्याही विधवा बन जाती हूं....
घर का माहौल बदल रहा है, मातम सा छा रहा है।
परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आ रही है
मेरे सारे श्रृंगार मुझ से छीने जा रहे है
घर के प्रत्येक व्यक्ति को चुप रहने की हिदायत दी जा रही है
" बच्चों आवाज मत करो दीदी पढ़ रही है" यह कह कर गली मोहले में सन्नाटा किया जा रहा है
खाना पानी कमरे में ही पहुंचाया जा रहा है
मुझे पूरा महसूस करवाया जा रहा है में बिन ब्याही विधवा बन गई हू
मां की आंखों में परीक्षा की चिंता पापा के मन में परिणाम का डर खाए जा रहा है
मैने अपनाया खाली कमरा जहां से किसी सुहागिन पर मेरी परछाई भी ना पड़े।
मैं ढूंढती हु किताबों में अपना भविष्य मुझे फिर से सुहागिन होने का मौका मिले।।



✍️ अंतिमा 😊

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मैं पहली बार कह सकती हूं इनका काल्पनिक घटनाओं से कोई लेना देना नहीं है......

खोल क्यों नहीं देते न्याय देवी के आंखों से पटी
बचपन से सुना था वर्दी धारी करते अपनी हिफाजत
थाने की चौखट पर बिकता सच
ईमान बेच कर लोग करते मर्यादा की बाते
मैने देखा ऐसा सच जहां महिला पुलिस कर्मी कह रही "बुलाओ उस रंडी को"
एक मिनट किसने कानून के रखवालों को रंडी कहने का हक है दिया
उसी क्षण मेरे मन में आया क्या इन मैडम को पता है जिसको अपमानजनक शब्द से बुला रही है उसने सच में जुर्म किया है या नहीं अगर किया भी है तो उसके लिए न्यायलय बैठा है
हा मैं यहां भूल गई न्याय देवी के आंखों में पटी जो बंधी है....
मैने देखा ऐसा सच न्याय के द्वार पर खड़े होकर हाथ फैलाए हुए कह रहा एक नौजवान " मैने शादी करके गुनाह थोड़े कर दिया"
एक मिनट उसका गुनाह देखेगा कौन...
मैं फिर से भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।
मैने देखा ऐसा सच जहां जन्म मरण है चलता
भगवान का दूसरा रूप कहने वाले ने कि ऐसी बात " पहले पैसे जमा करवाओ फिर ही इलाज होगा"
एक मिनट रुको डॉक्टर साहब आप जिस अस्पताल में खड़े हो वहां की सरकार ने निःशुल्क इलाज है किया
मैं फिर भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।।


✍️ अंतिमा 😊

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लड़कियों का सशक्त होना कितना जरूरी है......
यह उन लड़कियों से पूछिए जिनके घर में मर्द ना हो।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ......
मैं खुशनसीब हूं मेरे पापा ने मेरे हाथों से झाड़ू, बेलन को कलम में स्थानांतरित कर दिया।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ......
मैं खुशनसीब हूं पापा में नहीं सीख पाऊंगी अरे कैसे नहीं सीखेगी लड़किया हवाईजहाज उड़ा लेती है यह कह कर पीछे की सीट से आगे स्थानांतरित कर दिया।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ.....
लोग कहते थे बेटी है घर संभालेगी पापा ने कहा बेटी दुनिया संभलेगी पापा ने घर को दुनिया में स्थानांतरित कर दिया।
हा में बहुत खुशनसीब हूँ......
मेरी पहचान पापा से अपनी पहचान को पापा ने मेरी पहचान में स्थानांतरित कर दिया।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ ।।

✍️ अंतिमा 😊

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महाभारत महाभारत महाभारत.......
अब होगा मेरे घर में महाभारत का युद्ध शुरू
आ गया गर्मी का मौसम लोगो के बीच होने लगी तमतम
घर का आँगन बना कुरुक्षेत्र का मैदान
AC, TV रिमोड, पानी की बोतले बने है मेरे अस्त्र शस्त्र
"लाइट कहा मर गई" से होता युद्ध का प्रारम्भ
रणघोष सुनते ही योद्धा कूदे रणभूमि में
कोई अर्जुन सा तीर कमान लिए अपने कार्यों को अंजाम दिया
कोई बना कृष्ण सा सारथी जिसने वायु शीतलक यंत्र में शीतल जल की आवश्यकता है पार्थ का उपदेश है दिया
कोई बना कर्ण सा ज़िदी जिसने कार्य ना करने की सौगंध है खाई..
तो कोई बना भीष्म सा शांत जिसने बाणों की शय्या पर भी प्रतिज्ञा निभाई।
शाम हुई युद्ध भी थमा आमरस संग रोटी से पेट भरा
आज का महाभारत का युद्ध यही समाप्त हुआ
कल फिर योद्धा रणभूमि में आएंगे
अपने साहस मनोबल का परिचय देते हुए दुश्मन सेना को धूल चटाएंगे......

✍️ अंतिमा 😊

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जी हां मैं हूं कलयुग की नारी......
स्कूटी चलाने पर पापा की परी बन जाती हूं
मेकअप करने पर हीरोइन बन जाती हूं
अपनी राय देने पर ज्ञान की देवी बन जाती हूं
सिंपल रहने पर बहनजी बन जाती हूं
चुप रहने पर गूंगी बन जाती हूं
बात करने पर चालक बन जाती हूं
बाएं ओर का इंडीकेटर देकर दाएं की मूड जाने पर ahh वूमेन बन जाती हूं
अपनी मनपसंद जिंदगी जीने पर बतमीज बन जाती हूं
चमड़ी काली होने पर काली माता बन जाती हूं
हा में कलयुग की नारी सब पर भारी बन जाती हूं।।

✍️ अंतिमा 😊

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अब पहले जैसी बात कहां.......
बचपन वाला इतवार कहां
सावन की बरसात कहां
कागज वाली नाव कहां
अब पहले जैसी बात कहां......

मिठाइयों में मिठास कहां
दिवाली के पटाखों में तेज आवाज कहां
होली के रंगों की छाप कहां
अब पहले जैसी बात कहां.....

टीचर की वो फटकार कहां
दादा की वो डांट कहां
बस्ते का अब बोझ कहां
गर्मी की वो रात कहां
अब पहले जैसी बात कहां....

मॉडल खिलौनों में मिट्ठी वाली बात कहां
पतंग ना पकड़ने का पछतावा कहां
बिन आंसू रोने का बहाना कहां
होठों पर बचपन वाली मुस्कान कहां
अब पहले जैसी बात कहां.......

पापा की नजरों में वो डर कहां
मां के आंचल में सुकून कहां
बचपन वाली बात कहां
अब पहले जैसी बात कहां।।

✍️ अंतिमा 😊

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मेरे मन में एक सवाल उठा.........
अगर द्रौपदी को बचाने कृष्ण नहीं आते तो....
तो क्या पांचों पति अपनी गर्दन नीची करके उसका बलात्कार होने देते.
पांच पति होने के बावजूद भी माधव को बुलाना पड़े.....
तो क्या हम पुरुष के पुरुषत्व पर सवाल उठा सकते है।

मेरे मन में एक सवाल उठा..........
बचपन से लड़कियों को गुलाबी रंग और लड़कों को नीले रंग के कपड़े और खिलौने ही क्यों दिए गए..
क्यों लड़कियों को कोमल सी गुड़िया और लड़कों को सक्त बनने पर मजबूर किया गया......
अगर पुरुष कमजोर हुआ तो उसे चूड़ियां पहनने के लिए कहा गया
यदि चूड़ियां कमजोरी की निशानी है तो रण चंडी मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार में चूड़ियों को हटा देना चाहिए।

मेरे मन में एक सवाल उठा.........
औरत मां नहीं बनने पर बांझ कहलाई .
पुरुष बाप नहीं बनने पर क्या कहलाया ?
मैं बांझ का पुल्लिंग शब्द ढूंढ रही हूँ।

मेरे मन में एक सवाल उठा.........
माना कि महिला और पुरुष की शारीरिक बनावट अलग है. ईश्वर ने महिला को प्रजनन की क्षमता दी है
लेकिन ईश्वर ने नौकरी की क्षमता पुरुष को ही क्यों दी और महिला को घर के काम करने की।

मेरे मन में एक सवाल उठा.........
लोग कहते है जोड़ियां ऊपर से बन कर आती है...
तब तो पक्का ईश्वर जातिवाद को बढ़ावा देता है समान जात में जोड़ियां बनाकर भेजता है।

( काफी दिनों से ये सवाल मेरे मन में थे जिसे मैंने आपके साथ सांझा किया है )
✍️ अंतिमा 😊

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पापा, मैने सुना है आप मेहनत बहुत करते हो,
अपने शरीर का प्रयोग मशीन की तरह करते हो।
आपका झुर्रियों वाला सशक्त चेहरा मुझे प्रेरणा तो बहुत देता है,
परन्तु मेरा मन मुझे किसी दूसरी दुनियां में ले जाता है।
जहां में अपने लक्ष्य को छोड़ कर एक काल्पनिक दुनिया में जीती हु।।
पापा, मैने सुना है आप मेहनत बहुत करते हो.
रोजाना 40 रुपए बचा कर काम पर जाया करते हो,
जब आज मैने आपके धूल भरे उभरी नसों वाले पैर देखे तो, मेरा मन दया के सागर से उमड़ पड़ा, और में खुद को कोसने लगे।।
पापा, मैने सुना है आप मेहनत बहुत करते हो.
इस बार दिवाली पर मैने अपने मांगों की लिस्ट बना ली,
उसी पल आपने कहा बेटा मेरा गुलाबी कुर्ता बाहर निकाल देना जो पिछली दिवाली पहना था।
अपने हाथों में बनी लिस्ट को मैने इस तरह भींचा ,
मानो जैसे उसका दम घुट गया हो।
पापा, मैने सुना है आप मेहनत बहुत करते हो।।

✍️ अंतिमा 😊

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