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Amrita Singh

Amrita Singh

@aennyrajput8gmail.com810709


दिल कहता है कि बस उसकी एक झलक पा लूँ,
मगर जब वो सामने हो… नज़रों का तआ़रुफ़ (मिलना) भी न हो पाए।
धड़कनों की रवानी (तेज़ी) बढ़ जाती है,
लबों पर ठहरे लफ़्ज़ भी यूँ बिखर से जाएँ।

लेकिन जब घड़ी की सुइयाँ 11:11 पर ठहरती हैं,
उसकी यादें दिल में एक नई बेकरारी (बेसब्री) जगा जाती हैं।
वो लम्हा… वो एहसास… ख़्वाब-सा महक उठता है,
और ज़ुबाँ पर कोई अल्फ़ाज़ (शब्द) लाने की हिम्मत भी न रह जाती है

11:11
Amrita Singh ✍🏼

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मेरा इश्क़ भी दिल से ही रवाँ है,
मेरी नफ़रत भी उसी दिल में पलती है,
मेरे जज़्बात भी दिल से बिखरते हैं,
मेरे एहसास उसी में मसलते हैं।

मेरे आँसू दिल की ज़मीन पर गिरते हैं,
मेरी ख़ुशी वहीं कहीं दफ़्न हो जाती है,
मेरी तन्हाई दिल की गलियों में भटकती है,
मेरे शोर भी वहीं आकर ख़ामोश हो जाते हैं।

मेरी दुआ दिल से उठकर ख़ुदा तक जाती है,
मेरी बददुआ भी दिल में ही दम तोड़ती है—
मगर हैरत है कि
एक वही शख़्स है,
जो इस दिल से
आज तक
रुख़्सत होना नहीं सीख पाया।

Amrita Singh ✍🏽

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