Waiting for seven rounds - 3 in Hindi Love Stories by Bella books and stories PDF | सात_फेरो_का_इंतजार - 3

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सात_फेरो_का_इंतजार - 3

सात_फेरो_का_इंतजार

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किरण की जिंदगी अब मानो मुरझाये फूल सी हो गई थी। वो घंटों तक खिड़की के पास उदास बैठी रहती। अब उसे उम्मीद की कोई किरण नहीं लगती थी कि वो कभी मधुकर से मिल पाएगी। उसकी रातें एकदम खामोश सी हो गई थीं। सारी रात वो सिसकियाँ भर-भर के रोती, और इधर उसके पिताजी ने उसे इतनी बुरी तरह से मारा कि उसे खून की उल्टियाँ होने लगीं। पर उसके घर वाले फिर भी यही चाहते थे कि वो मर जाए, इसलिए उसे अस्पताल भी नहीं ले गए। 

डिप्रेशन को झेलते-झेलते अब वो धीरे-धीरे अस्थमा की शिकार होने लगी, लेकिन घर वालों ने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया। उसकी बीमारी बढ़ती गई, और वो हमेशा हालातों से लड़ती रही। उसे मधुकर की बहुत याद आती, पर वो उससे बात नहीं कर पाती थी।

एक दिन वो अपने आँगन की सीढ़ियों पर ऐसे बैठी थी, जैसे कि मानो उसे मधुकर ने ही बुलाया हो। किरण दीवार से सर लगाकर, एकटक उदास मन से सड़क की तरफ देख रही थी। तभी वहाँ मधुकर अपने दोस्त के बहाने से किरण को देखने आता है। वो किरण को बाहर बैठे देख लेता है, और किरण भी उसे देख लेती है। किरण मन ही मन अपनी किस्मत को कोसती है कि वो मधुकर को सिर्फ देख पाती है, लेकिन उससे बात नहीं कर पाती, उसे छू नहीं सकती, उसे प्यार नहीं कर सकती। 

अब किरण हर शाम मधुकर के इंतजार में आँगन में बैठ जाती। मधुकर भी रोज उसे देखने आता। एक-दूसरे को देखकर भी उन दोनों के दिल को अलग ही सुकून मिलता था। इस रिश्ते में बहुत गहराई और प्रेम था, जिसे केवल वो दोनों ही महसूस कर सकते थे। इस लड़ाई ने उन दोनों के प्यार को खत्म नहीं किया, बल्कि उनके प्यार को एक मजबूत और सच्चा रिश्ता बनाया, जो आज के जमाने में बहुत मुश्किल और अनूठा था। दोनों सिर्फ एक-दूसरे की झलक पाकर भी प्रेम की अनुभूति कर सकते थे। 

कुछ दिन इसी तरह गुजरने के बाद, किरण किसी तरह बहाना करके कॉलेज जाती है। घर वाले उसे समझा-बुझाकर भेजते हैं कि अब वो कभी भी मधुकर से बात करने की कोशिश नहीं करेगी। किरण उनकी हाँ में हाँ कर देती है, और आँखों में आँसू लेकर घर से निकल जाती है। 

कॉलेज के बाहर उतरते ही वो देखती है कि मधुकर वहाँ उसका इंतजार कर रहा था। उसे देखते ही मधुकर उसके पास आता है, लेकिन किरण उससे कोई बात नहीं करती और उसे डाँटते हुए, चिल्लाते हुए चली जाती है कि उसे उससे कोई बात नहीं करनी है। और कॉलेज के अंदर चली जाती है। 

मधुकर पूरा दिन भारी बारिश में किरण का इंतजार करके कॉलेज के गेट पर बैठा रहता है। आने जाने वाले सभी लोग उसे पागल कहते है लेकिन वो बस यही सोचता है आखिर किरण ने ऐसा क्यूं किया उस से बात क्यूं नहीं की?उसके मन में यही सवाल था कि क्या? किरण उसे छोड़कर चली जाएगी क्या वो अब उस से बात करना बंद कर देगी। मधुकर की आंखों में सिर्फ आंसू थे। 
             
                          लेखिका - भूमिका त्रिवेदी 

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                    धन्यवाद