Waiting for seven rounds - 2 in Hindi Love Stories by Bella books and stories PDF | सात_फेरो_का_इंतजार - 2

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सात_फेरो_का_इंतजार - 2

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*पहली नज़र का इश्क़*  
*लेखिका: भूमिका त्रिवेदी*

किरण को मधुकर पहली नज़र में ही पसंद आ गया था। मधुकर दिखने में काफ़ी सुंदर था, और उसका एटीट्यूड तो सबके दिलों पर छा जाता था। हल्की-सी मूंछें, चौड़ा सीना और गोरा रंग लिए मधुकर ऐसा था कि किसी की भी नज़र उस पर ठहर जाए।

पहले दिन की क्लास में मधुकर और किरण का सिर्फ़ परिचय हुआ। अगले दिन से सभी बच्चे आने लगे और क्लास रोज़ लगने लगी। किरण धीरे-धीरे मधुकर को चाहने लगी। वह सोचती कि किसी तरह मधुकर से बात करने का मौका मिल जाए। मधुकर से बात बढ़ाने के लिए किरण ने उससे मदद माँगी कि वह उसके प्रोजेक्ट के चित्र बना दे। मधुकर भी उसे चाहता तो था ही, इसलिए उसने हाँ कर दी और उसका काम बहुत अच्छे तरीके से कर दिया।

एक दिन मधुकर ने क्लास के बच्चों का ग्रुप बनाने को कहा। किरण ने उसमें लड़कों के नंबर भी जोड़ दिए। तब मधुकर ने उसे पर्सनल मैसेज किया— 'बुद्धू, लड़कों को मत ऐड करो'। ये सुनकर किरण को बहुत अच्छा लगा और वह उसकी तरफ खिंची चली गई। धीरे-धीरे दोनों की बातचीत शुरू हुई और ये बातचीत कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला।

किरण और मधुकर को बात करते हुए एक ही महीना हुआ था कि अब उसके घर वाले उसके रिश्ते की बात करने लगे। तब किरण ने अपने और मधुकर के रिश्ते के बारे में घर वालों को बता दिया।

यह सब सुनकर घर वाले हैरान हो गए और किरण के पिताजी किशोर जी उस पर डंडों से टूट पड़े। उन्होंने उसे बहुत बुरे तरीके से मारा। किरण मार खाते-खाते ज़मीन पर लेट जाती है, फिर भी उसके पिताजी नहीं रुकते और उसको लातों-घूंसों से बहुत मारते हैं। किरण के पूरे शरीर में चोट लगती। पेट में और सीने पर डंडे से वार करने से उसे बहुत चोट लगती, बस उसका सिर किसी तरह बच जाता है।

किरण की माँ और बहन खड़े होकर सब देख रही थीं, पर किसी ने भी उसे बचाया नहीं। वो कहते हैं ना, औरत ही औरत को समझ नहीं पाती। किरण चीखती-चिल्लाती रही। उसके बाद किरण दो दिन तक अपने बिस्तर से उठ भी नहीं पाई। पिता किशोर जी उसे बार-बार परेशान करते, "तुझे करना क्या है? ये हमें बता। अभी के अभी कहीं और शादी के लिए हाँ कर।"

किरण बहुत दबाव में आ जाती है और हाँ भी कर देती है किसी लड़के से शादी करने के लिए। पर किस्मत से वो लड़का मना कर देता है। एक महीने बाद किरण हिम्मत जुटाकर मधुकर को सारी बात बताती है और फ़ोन पर बहुत रोती है। मधुकर भी बहुत रोता है और उसे दिलासा देता है कि बस वो हिम्मत रखे, सब ठीक हो जाएगा।

इसके बाद किरण से उसके घर वाले मोबाइल भी छीन लेते हैं और उसका घर से बाहर निकलना भी अब मना है। वो घर की चार दीवारी में कैद हो गई। पर उस कैद में भी किरण की आँखों में मधुकर के लिए इश्क़ ज़िंदा था। वो जानती थी, एक दिन ये दीवारें ज़रूर टूटेंगी।