*"सात फेरों का इंतज़ार, सौ सवालों की बरसात"*
_ प्रेम कहानी - किरण और मधुकर_
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किरण गाँव की सबसे भोली और सीधी-साधी लड़की थी। उसका स्वभाव इतना विनम्र था कि पूरा गाँव उसकी मिसाल देता था। सबकी परवाह करना, सबको हँसकर मिलना - यही उसकी पहचान थी। किरण का परिवार बहुत बड़ा था। चाचा, ताऊ, बुआ - पूरा कुनबा एक साथ रहता था। वही दुसरी तरफ मधुकर और उसकी बहन और उसके माता पिता अपने गांव से काफी दूर दूसरे राज्य में रहते थे। मधुकर बहुत मेहनती लड़का था और वह अपने परिवार से बहुत प्यार करता था।
उसी गाँव में किरण की बुआ की शादी करवाई थीं। जहां मधुकर और उसकी बहन बचपन से पल-बढ़ रहे थे। मधुकर की बहन भी बहुत सुंदर और विनम्र लड़की थी और घर पर भी सबकी चहेती थी और मधुकर भी उसे बहुत प्यार करता था।
अजीब बात ये थी कि किरण बचपन में अक्सर बुआ के घर आती-जाती थी, पर उसकी और मधुकर की कभी मुलाकात नहीं हुई। ना ही उसकी बहन से कभी किरण की कोई मुलाकात हुई। मानो किस्मत ने उनकी पहली मुलाकात के लिए कोई खास वक्त चुन रखा था।
समय पंख लगाकर उड़ गया। मधुकर पढ़ाई के लिए बैंगलोर चला गया। वहां उसने काफी समय जॉब में बिताया पढ़ाई के साथ साथ उसके पापा एक टैक्सटाइल इंजीनियर थे वो भी वहीं पर पास की एक कंपनी में काम करने लगे थे। और मधुकर की मां अध्यापक थी उसी गांव के स्कूल में जहां किरण की बुआ का लड़का भी पढ़ता था मधुकर की मां के गांव के लोगों से बहुत अच्छे संबंध थे और वह गांव के ही बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी किरण की बुआ और मधुकर की मां एक दूसरे को अच्छे से जानते थे। उधर किरण बड़ी हो रही थी। उसने बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद पास के ही गाँव वाले कॉलेज में दाखिला ले लिया।
किस्मत का खेल देखिए। मधुकर ने भी अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कुछ दिन एक निजी कंपनी में काम करने के बाद उसका मन बदल गया। उसने सोचा - क्यों न गाँव लौटकर कुछ किया जाए। और वो उसी कॉलेज में अंग्रेज़ी का अध्यापक बनकर आ गया, जहाँ किरण पढ़ती थी।
उस समय कॉलेज में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाला कोई था नहीं। बच्चे भी कक्षा में कम ही आते थे। जिस दिन मधुकर की पहली डेमो क्लास थी, उस दिन पूरी क्लास में सिर्फ एक ही छात्रा बैठी थी - किरण।
मधुकर ने ब्लैकबोर्ड पर "Good Morning" लिखा और मुस्कुराकर पूछा, "आज सिर्फ एक ही छात्र? नाम क्या है आपका?"
किरण ने नज़रें झुकाकर धीरे से कहा, किरण।"
खिड़की से आती हवा में एक नया एहसास था। वो पहला दिन शायद कुछ खास था। ब्लैकबोर्ड पर लिखे "Good Morning" से दिन की शुरुआत नहीं, शायद एक नई कहानी की शुरुआत हो रही थी।
पर इस कहानी में सात फेरों तक पहुँचने से पहले सौ सवाल खड़े थे।
टीचर और छात्रा का रिश्ता? गाँव वाले क्या कहेंगे? किरण का बड़ा परिवार मानेगा? मधुकर के माता-पिता इस रिश्ते को हाँ कहेंगे?
सवाल बहुत थे... पर जवाब सिर्फ वक्त के पास था।
*[समाप्त]*
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