यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन करना है इसका किसी भी व्यक्ति स्थान या घटना से कोई संबंध नहीं है
पुराने जमाने में लोग अजनबियों से बिड़ी मांगते थे और जो नहीं देता था उसके बारे में कहा जाता था कि वो ज्यादा दिन गांव में नहीं टिकता गांव का नाम था भूतखेड़ा जहां दिन में सब सामान्य लगता था लेकिन रात होते ही हवा तक अजीब हो जाती थी कहते हैं रात के सन्नाटे में एक चुड़ैल अपनी पायल की छम-छम से पूरे गांव को जगा देती थी
वो आवाज इतनी साफ होती थी कि सोया हुआ इंसान भी एकदम उठकर बैठ जाता था जैसे किसी ने कान में फुसफुसाया हो दिन में वही चुड़ैल बच्चों को डराती थी उनके पीछे-पीछे चलती थी और अचानक गायब हो जाती थी बच्चे घर आकर रोते थे लेकिन बड़े लोग बस चुप कराते थे क्योंकि वो सच्चाई जानते थे रात में बूढ़ों की सबसे ज्यादा बुरी हालत होती थी क्योंकि चुड़ैल उन्हें उनकी खटिया समेत उठा कर खेतों में फेंक देती थी
सुबह जब लोग खेत में जाते तो कोई न कोई बूढ़ा बेहोश पड़ा मिलता और उसके मुंह से सिर्फ एक ही आवाज निकलती छम छम
गांव वाले डरते थे लेकिन उन्होंने इससे बचने का एक तरीका निकाल लिया था हर रात पीपल के पेड़ के नीचे बिड़ी रख देना कहते थे अगर चुड़ैल को बिड़ी मिल जाए तो वो उस रात किसी को नहीं उठाती लेकिन अगर किसी दिन कोई बिड़ी रखना भूल जाए तो उस रात गांव में कोई न कोई जरूर गायब हो जाता था एक दिन गांव में एक नया लड़का आया जिसका नाम था कल्लू और उसे इन सब बातों पर बिल्कुल यकीन नहीं था
उसने गांव वालों को हंसते हुए कहा कि ये सब अंधविश्वास है और कोई चुड़ैल-वुड़ैल नहीं होती
गांव के एक बूढ़े ने उसे समझाया कि रात में बाहर मत निकलना लेकिन कल्लू ने उसकी बात को मजाक समझ लिया उस रात कल्लू ने जानबूझकर पीपल के पेड़ के पास जाकर बैठने का फैसला किया ताकि सच का पता चल सके
चारों तरफ सन्नाटा था हवा भी जैसे रुक गई थी और अचानक दूर से पायल की आवाज आई
छम छम छम
कल्लू पहले हंसा लेकिन जैसे-जैसे आवाज करीब आती गई उसकी हंसी गायब हो गई
उसने चारों तरफ देखा लेकिन कोई नहीं था सिर्फ आवाज थी जो उसके चारों तरफ घूम रही थी
अचानक उसके पीछे से एक धीमी आवाज आई बिड़ी है क्या
कल्लू का गला सूख गया लेकिन उसने हिम्मत करके पीछे देखा तो उसके सामने एक औरत खड़ी थी जिसके पैर उल्टे थे और बाल जमीन तक फैले हुए थे
कल्लू डर गया लेकिन फिर भी उसने अपनी जेब से बिड़ी निकालकर उसकी तरफ बढ़ा दी
चुड़ैल ने बिड़ी ली और धीरे से मुस्कुराई जैसे उसे मजा आ रहा हो कुछ सेकंड तक दोनों के बीच सन्नाटा रहा और फिर दूर से एक चीख सुनाई दी
कल्लू ने पीछे मुड़कर देखा तो गांव की तरफ से लोग भागते हुए आ रहे थे उन्होंने बताया कि एक बूढ़ा अपनी खटिया समेत गायब हो गया है
कल्लू को समझ आ गया कि ये सब मजाक नहीं है ये सच है और वो इसके बीच में फंस चुका है
वो भागना चाहता था लेकिन उसके पैर जैसे जमीन में धंस गए थे चुड़ैल उसके चारों तरफ घूमते हुए बोली डर गया या दोस्ती करेगा
कल्लू ने डरते हुए कहा मुझे जाने दो
चुड़ैल हंसी और उसकी हंसी इतनी डरावनी थी कि रात और गहरी लगने लगी अचानक सब कुछ शांत हो गया और कल्लू खुद को अपने घर के अंदर खड़ा पाया सुबह जब वो उठा तो उसे लगा कि ये सब सपना था लेकिन उसके पैरों में मिट्टी लगी हुई थी गांव वालों ने उसे बताया कि उसके पैरों के निशान खेत तक गए थे अब कल्लू का डर विश्वास में बदल चुका था और उसने तय किया कि वो इस रहस्य को खत्म करेगा उस रात वो फिर पीपल के पेड़ के पास गया इस बार बिना डर के
जैसे ही रात गहरी हुई वही आवाज फिर आई
छम छम छम
चुड़ैल उसके सामने आई और इस बार उसका चेहरा और भी भयानक था
कल्लू ने उससे पूछा तू ये सब क्यों करती है
कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया और फिर चुड़ैल ने धीमी आवाज में कहा क्योंकि मुझे याद रखा जाए उसने बताया कि सालों पहले गांव वालों ने उसे डायन समझकर जिंदा जला दिया था
अब वो हर रात किसी को उठाकर ले जाती है ताकि लोग उसका डर कभी न भूलें
कल्लू ने कहा कि डर से नहीं इंसानियत से भी याद रखा जा सकता है चुड़ैल कुछ पल के लिए चुप हो गई, जैसे सोच रही हो अचानक गांव से फिर चीखें आने लगीं और इस बार दो लोग गायब हो गए थे
चुड़ैल ने कहा आज बिड़ी नहीं रखी गई कल्लू को समझ आ गया कि ये सब एक नियम पर चल रहा है उसने गांव वालों को इकट्ठा किया और कहा कि हर रात बिड़ी रखना जरूरी है गांव वाले मान गए लेकिन डर खत्म नहीं हुआ धीरे-धीरे कल्लू खुद हर रात बिड़ी रखने जाने लगा लोगों ने सोचा कि वो गांव को बचा रहा है लेकिन सच्चाई कुछ और थी
एक रात एक बच्चा चुपके से उसके पीछे-पीछे गया उसने देखा कि कल्लू अकेला नहीं था
उसके पीछे एक परछाई चल रही थी और पायल की आवाज उसी के कदमों के साथ मिल रही थी
बच्चा डर के मारे भाग गया लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया अब गांव में सिर्फ एक ही बात कही जाती है कल्लू बच गया
लेकिन सच ये है कि वो अब चुड़ैल का हिस्सा बन चुका है
आज भी हर रात वो बिड़ी लेकर पेड़ के नीचे जाता है और उसके पीछे वही आवाज गूंजती है
छम छम छम
और जिस दिन कोई नया आदमी गांव में आता है सबसे पहले उससे पूछा जाता है
बिड़ी है क्या