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अंधेरी रात का साया
लेखक: विजय शर्मा एरी
प्रस्तावना
रात का सन्नाटा हमेशा कुछ कहता है। कभी यह शांति का प्रतीक होता है, तो कभी डर और रहस्य का। आधी रात के समय जब पूरा गाँव नींद में डूबा था, तभी एक अजीब घटना ने सबको हिला दिया। यह कहानी उसी रहस्य की है, जो अंधेरी रात में जन्मा और धीरे-धीरे सबके सामने खुला।
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भाग 1: गाँव का सन्नाटा
गाँव "रामपुर" छोटा सा था। चारों ओर खेत, बीच में तालाब और किनारे पर पुराना बरगद का पेड़। लोग दिनभर मेहनत करते और रात को जल्दी सो जाते। लेकिन उस रात, जब घड़ी ने बारह बजाए, अचानक तालाब के किनारे से अजीब आवाजें आने लगीं।
रामू, जो चौकीदार था, ने सबसे पहले सुना। आवाज किसी के रोने जैसी थी। वह डरते-डरते बरगद के पेड़ की ओर बढ़ा। पेड़ के नीचे एक परछाई खड़ी थी। लंबा कद, सफेद कपड़े, और चेहरा धुंध में छिपा हुआ।
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भाग 2: रहस्यमयी परछाई
रामू ने हिम्मत करके पूछा—
“कौन है वहाँ?”
परछाई ने कोई जवाब नहीं दिया। बस धीरे-धीरे तालाब की ओर बढ़ गई। रामू का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने गाँव के प्रधान को जगाया।
सुबह होते ही यह खबर पूरे गाँव में फैल गई। लोग कहने लगे कि यह कोई आत्मा है, जो बरगद के पेड़ से बंधी है। कुछ ने कहा कि यह पुरानी हवेली की मालकिन की आत्मा है, जो सालों पहले रहस्यमय ढंग से गायब हो गई थी।
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भाग 3: हवेली का इतिहास
गाँव के बाहर एक पुरानी हवेली थी। कहते हैं कि वहाँ कभी ठाकुर साहब रहते थे। उनकी पत्नी, राधिका, बेहद सुंदर और दयालु थी। लेकिन एक रात अचानक वह गायब हो गई। लोग कहते हैं कि तालाब में डूब गई, पर कोई सबूत नहीं मिला।
तब से हवेली वीरान पड़ी थी। बच्चे वहाँ जाने से डरते थे। गाँव वाले मानते थे कि राधिका की आत्मा अब भी हवेली और तालाब के बीच भटकती है।
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भाग 4: जिज्ञासु युवक
गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक था। पढ़ाई में तेज और रहस्यों को सुलझाने का शौक़ीन। उसने तय किया कि वह इस रहस्य को सुलझाएगा।
अर्जुन ने रात को तालाब के पास पहरा देना शुरू किया। तीन रात तक कुछ नहीं हुआ। लेकिन चौथी रात, ठीक बारह बजे, वही परछाई फिर दिखाई दी। अर्जुन ने साहस करके उसका पीछा किया।
परछाई हवेली की ओर बढ़ी। हवेली के दरवाज़े अपने आप खुल गए। अर्जुन अंदर गया। वहाँ धूल, मकड़ी के जाले और टूटी खिड़कियाँ थीं। लेकिन बीच में एक पुराना संदूक रखा था।
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भाग 5: संदूक का रहस्य
अर्जुन ने संदूक खोला। उसमें पुराने पत्र और एक डायरी थी। डायरी राधिका की थी। उसमें लिखा था कि ठाकुर साहब उसे बहुत प्यार करते थे, लेकिन हवेली के नौकरों में से कोई उसकी दुश्मनी करता था।
आखिरी पन्ने पर लिखा था—
“अगर मैं गायब हो जाऊँ, तो सच्चाई तालाब के नीचे छिपी होगी।”
अर्जुन चौंक गया। उसने अगले दिन तालाब में गोताखोर बुलाए।
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भाग 6: सच्चाई का खुलासा
तालाब के नीचे से एक लोहे का बक्सा निकला। उसमें गहने और कुछ दस्तावेज़ थे। दस्तावेज़ों से पता चला कि हवेली का नौकर ही राधिका को मारकर तालाब में छिपा गया था।
गाँव के बुजुर्गों ने यह देखकर कहा—
“तो यह आत्मा नहीं, बल्कि राधिका की अधूरी कहानी थी, जो हमें सच बताना चाहती थी।”
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भाग 7: आत्मा की मुक्ति
उस रात फिर परछाई दिखाई दी। लेकिन इस बार वह शांत थी। उसने हवेली के दरवाज़े पर खड़े होकर धीरे-धीरे मुस्कुराया और फिर धुंध में विलीन हो गई।
गाँव वालों ने माना कि राधिका की आत्मा अब मुक्त हो गई है। हवेली को मंदिर बना दिया गया। लोग वहाँ दीप जलाने लगे।
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उपसंहार
अंधेरी रात का रहस्य अब सुलझ चुका था। गाँव में फिर से शांति लौट आई। लेकिन लोग आज भी कहते हैं कि जब कोई अधूरी कहानी होती है, तो वह रात के सन्नाटे में ज़रूर आवाज़ देती है।
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