एपिसोड 1: मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं का साथ दे रहा हो, जो उसके गालों पर लगातार लुढ़क रहे थे। अनन्या अपने छोटे से एक कमरे के घर में अकेली बैठी थी। कमरे की दीवारें पुरानी और नम थीं, छत से पानी टपक रहा था। उसके हाथों में भाई अंकित का एक पुराना फोटो थामा हुआ था – वो फोटो जिसमें अंकित मुस्कुराता हुआ स्कूल यूनिफॉर्म में खड़ा था, उसकी आँखों में सपनों की चमक। अंकित, उसका इकलौता भाई, माँ-बाप के जाने के बाद उसका सहारा, उसका संसार।सिर्फ दो हफ्ते पहले सब कुछ ठीक था। अंकित एक छोटी सी प्राइवेट कंपनी में काम करता था, रात-दिन मेहनत करके अनन्या की पढ़ाई का खर्च उठाता। अनन्या बी.कॉम फाइनल ईयर में थी, मिडिल क्लास फैमिली की समझदार बेटी, जो हमेशा भाई से चिपकी रहती। लेकिन एक रात, पुलिस ने अंकित को गिरफ्तार कर लिया। झूठा मर्डर केस! शहर के एक बड़े बिजनेसमैन का मर्डर, और विटनेस ने अंकित का नाम ले लिया। "ये साजिश है दीदी! कोई दुश्मन ने फँसाया," जेल जाते वक्त अंकित ने चिल्लाया था। अनन्या ने कोशिश की – वकील, प्रोटेस्ट, लेकिन सब बेकार। "भैया, मैं तुम्हें बाहर निकालूँगी... चाहे कुछ भी करना पड़े," अनन्या ने फोटो को सीने से लगाया, आँसू पोंछे और ठान लिया। कल सुबह वकील के पास जाना है।अगले दिन सुबह धूप खिली थी, लेकिन अनन्या के चेहरे पर उदासी बरकरार। वो पटना के एक बड़े वकील, रामेश्वर जी के चैंबर पहुँची। रामेश्वर जी चश्मा उतारते हुए बोले, "बेटी, बैठो। केस बहुत जटिल है। विटनेस ने उल्टा बयान दे दिया। CBI तक बात पहुँच गई। सारे रास्ते बंद। सिर्फ एक ही आदमी ये केस दबा सकता है – आर्यन राठौर।" अनन्या का दिल धक् से रह गया। आर्यन राठौर? वो नाम जिसे सुनते ही पटना-दिल्ली तक के लोग सिहर उठते थे। अंडरवर्ल्ड का किंग, जिसकी एक उँगली उठाने से पुलिस वाले काँपते, जज सिर झुकाते। अखबारों में उसकी कहानियाँ – डील्स, मर्डर, लेकिन कभी पकड़ा न गया। "वो... कैसे मदद करेगा?" अनन्या ने काँपते स्वर में पूछा। रामेश्वर जी ने सिर हिलाया, "उसके पास पावर है। लेकिन वो फ्री में कुछ नहीं करता। शाम को उसके फार्महाउस चली जाना। मैं अपॉइंटमेंट फिक्स कर देता हूँ। लेकिन सावधान, बेटी। वो इंसान नहीं, भूत है।"शाम ढलते-ढलते अनन्या फार्महाउस के गेट पर पहुँची। पटना से 20 किलोमीटर दूर, जंगल के बीचों-बीच। काले गेट पर सिक्योरिटी गार्ड्स ने चेक किया। अंदर घुसते ही लग्जरी का दुनिया दिखा – स्विमिंग पूल, लॉन, हेलिपैड। अनन्या का साधारण सलवार सूट यहाँ अजनबी लग रहा था। उसे लिविंग रूम में ले जाया गया। वहाँ काले सूट में आर्यन राठौर सोफे पर बैठा था। लंबा कद, चौड़ी छाती, चेहरा निखरा लेकिन भावहीन। हाथ में सिगार, धुआँ धीरे-धीरे उड़ रहा। उसकी आँखें बर्फ जैसी ठंडी लग रही थीं, लेकिन गहराई में जलती आग छिपी हुई – बदले की आग। कम बोलने वाला उसका स्वभाव मशहूर था। वो बोला, "क्या चाहिए?" सिर्फ तीन शब्द, लेकिन आवाज़ में दम।अनन्या ने घुटने मोड़े, "सर... मेरा भाई... अंकित मिश्रा। उसे झूठे मर्डर केस में फँसा दिया। बेकसूर साबित कर दो। प्लीज!" उसकी आवाज़ काँप रही थी। आर्यन ने सिगार एशट्रे में राख झाड़ी, एक ठंडी हँसी हँसी। "शर्त है।" अनन्या चौंकी, "क...कैसी शर्त?" आर्यन ने सीधे आँखों में देखा, "मुझसे शादी करो। सिर्फ 6 महीने के लिए। उसके बाद आज़ाद। भाई बाहर, केस क्लोज।" अनन्या स्तब्ध रह गई। शादी? उससे? "क्यों? मैं... मैं क्या हूँ आपको?" आर्यन ने जवाब नहीं दिया। बस आँखों में वो चमक – बदले की चमक। शायद कोई पुराना हिसाब। अनन्या का दिमाग घूम गया। भाई जेल में सड़ रहा, फैमिली बर्बाद। कोई चारा न था। "ठीक है... हाँ।"अगले दिन दोपहर कोर्ट पहुँचे। सिंपल कोर्ट मैरिज। अनन्या ने लाल साड़ी पहनी, लेकिन मंगलसूत्र बाँधते वक्त हाथ काँपे। आर्यन ने रिंग पहनाई, बिना भाव के। जज ने कहा, "शादी संपन्न।" बाहर आते ही आर्यन ने कहा, "पेपर साइन करो। कॉन्ट्रैक्ट पढ़ लो।" कागजात में लिखा था – 6 महीने, कोई फिजिकल रिलेशन नहीं, बाहर बीवी का रोल, अंदर कुछ नहीं। अनन्या ने साइन किया, दिल भारी। शाम को अंकित को जमानत मिल गई। अनन्या घर दौड़ी, भाई को गले लगाया। "दीदी, ये चमत्कार कैसे?" अंकित ने पूछा। अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा, "एक दोस्त ने मदद की।" लेकिन सच छिपाया।शादी की पहली रात आर्यन का बंगला। अनन्या को अलग कमरा मिला। वो बिस्तर पर बैठी सोच रही – ये सब क्यों? आर्यन कमरे में घुसा, जैकेट उतारी। "ये सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट है। प्यार मत करना। भावनाएँ मत लाना। 6 महीने बाद अलग।" उसकी आवाज़ ठंडी, लेकिन आँखों में वो आग। अनन्या ने सिर हिलाया, "मैं समझती हूँ। लेकिन... ये बदला किसका है? मेरा भाई तो बेकसूर।" आर्यन रुक गया। एक सेकंड के लिए उसका चेहरा बदला, फिर मुस्कुराया। "समय आएगा, जानोगी। अभी सो जाओ। कल से नई जिंदगी शुरू।"अनन्या बिस्तर पर लेटी, लेकिन नींद न आई। बाहर बारिश फिर शुरू हो गई। फोन पर अंकित का मैसेज – "दीदी, खुश रहना।" अनन्या रो पड़ी। ये शादी मजबूरी की है, लेकिन दिल में सवाल उठा – आर्यन राठौर का बदला किसका है? क्या ये सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट है, या कुछ बड़ा राज़ छिपा है? तभी दरवाजे पर खटखटाहट... कौन?