Sodo me Bandhi Jindagi - 2 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 2

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सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 2

शादी की पहली रात आर्यन का बंगला। अनन्या को अलग कमरा मिला। वो बिस्तर पर बैठी सोच रही – ये सब क्यों? आर्यन कमरे में घुसा, जैकेट उतारी। "ये सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट है। प्यार मत करना। भावनाएँ मत लाना। 6 महीने बाद अलग।" उसकी आवाज़ ठंडी, लेकिन आँखों में वो आग। अनन्या ने सिर हिलाया, "मैं समझती हूँ। लेकिन... ये बदला किसका है? मेरा भाई तो बेकसूर।" आर्यन रुक गया। एक सेकंड के लिए उसका चेहरा बदला, फिर मुस्कुराया। "समय आएगा, जानोगी। अभी सो जाओ। कल से नई जिंदगी शुरू।"अनन्या बिस्तर पर लेटी, लेकिन नींद न आई। बाहर बारिश फिर शुरू हो गई। फोन पर अंकित का मैसेज – "दीदी, खुश रहना।" अनन्या रो पड़ी। ये शादी मजबूरी की है, लेकिन दिल में सवाल उठा – आर्यन राठौर का बदला किसका है? क्या ये सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट है, या कुछ बड़ा राज़ छिपा है? तभी दरवाजे पर खटखटाहट... कौ

अजनबी पतिआर्यन का बंगला पटना शहर से 30 किलोमीटर दूर, घने जंगल के किनारे बसा था। रात के अंधेरे में वो महल जैसा लग रहा था – ऊँची दीवारें, कड़ी सिक्योरिटी, और लाइट्स जो दूर से चमक रही थीं। अनन्या कार से उतरी, हाथ में छोटा सा बैग, दिल धड़क रहा था। पहली बार अंदर घुसते हुए डर सता रहा था। गेट पर आर्म्ड गार्ड्स ने सलाम ठोका, लेकिन आर्यन ने उसे इग्नोर किया। वो आगे बढ़ा, बिना पलटे। अनन्या को एक नौकरानी ने ले जाकर उसके कमरे में पहुँचाया। कमरा लग्जरी था – किंग साइज बेड, बड़ा वार्डरोब, बालकनी से जंगल दिख रहा। लेकिन अनन्या को ये सब अजनबी लग रहा। "ये मेरा घर कैसे बनेगा?" उसने आईने में खुद से कहा।शाम को डिनर टेबल पर बुलाया गया। लंबी महफिल जैसी टेबल, सिर्फ दो कुर्सियाँ भरी। आर्यन विपरीत बैठा, ब्लैक शर्ट में, आँखें फोन पर। नौकरों ने खाना सर्व किया – चिकन बिरयानी, रायता, सलाद। अनन्या ने चावल का एक कौर लिया, घुटने काँप रहे। आर्यन ने बिना देखे कहा, "कल से तुम मेरी बीवी बनोगी। बाहर सबके सामने। पार्टी, मीटिंग्स, फैमिली फंक्शन्स – परफेक्ट रोल प्ले। अंदर... कुछ नहीं। कोई सवाल, कोई प्यार, कोई एक्सपेक्टेशन। समझी?" उसकी आवाज़ ठंडी थी, जैसे बिजनेस डील हो। अनन्या ने हिम्मत जुटाई, "तुम्हें मेरे भाई से क्या लेना? क्यों ये शादी? सच बोलो आर्यन!" आर्यन ने फोन नीचे रखा, आँखों में वो आग भड़की। जवाब न दिया। तभी उसका फोन वाइब्रेट हुआ। मैसेज पढ़ा – "बदला पूरा करो। वक्त आ गया।" चेहरा सख्त हो गया। "खाना खाओ। सो जाओ," बस इतना कहा और चला गया।अनन्या डिनर अधूरा छोड़ कमरे में लौटी। बिस्तर पर लेटी, लेकिन नींद कहाँ? दिमाग में सवाल घूम रहे – आर्यन का भाई? बदला? क्या कनेक्शन है अंकित से? रात के 2 बजे दरवाजा खुला। अनन्या चौंककर उठी। आर्यन अंदर, हाथ में मोटी फाइल, चेहरा गंभीर। "ये पढ़ो," फाइल बढ़ाई। अनन्या ने खोली – अंकित के केस की डिटेल्स, विटनेस स्टेटमेंट्स, पुलिस रिपोर्ट्स। "तेरा भाई बेकसूर है। कल सुबह जमानत हो जाएगी। मेरे लोग कोर्ट में हैं।" अनन्या की आँखें चमक उठीं, आँसू लुढ़क आए। "थैंक यू... लेकिन क्यों? फ्री में?" आर्यन ने पहली बार करीब आकर कहा, "मेरा भाई भी मरा था। 5 साल पहले। झूठे मर्डर केस में जेल, फिर एनकाउंटर। तेरी फैमिली का कनेक्शन... शायद। प्रूफ ढूँढ रहा हूँ। इसलिए ये शादी। ट्रस्ट टेस्ट।" अनन्या चौंक गई। "मेरी फैमिली? पापा-मम्मी तो गरीब थे। अंकित तो..." आर्यन ने टोका, "समय आएगा। अभी कॉन्ट्रैक्ट फॉलो करो।" कहकर चला गया।अनन्या फाइल पढ़ती रही। अचानक फोन बजा – अंकित! "दीदी, कल सुबह बाहर! जमानत अप्रूव!" अनन्या खुशी से चिल्लाई। लेकिन खुशी अधूरी रही। बाहर गाड़ियों की ब्रेक साउंड, फिर गनशॉट्स! अनन्या बालकनी पर दौड़ी – काले SUV, मास्क्ड मेन, गेट तोड़ रहे। "दुश्मन आ गए!" अनन्या का दिल बैठ गया। आर्यन कहाँ?