Life Bound in Sad - Episode 3 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 3

Featured Books
Categories
Share

सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 3

अनन्या डिनर अधूरा छोड़ कमरे में लौटी। बिस्तर पर लेटी, लेकिन नींद कहाँ? दिमाग में सवाल घूम रहे – आर्यन का भाई? बदला? क्या कनेक्शन है अंकित से? रात के 2 बजे दरवाजा खुला। अनन्या चौंककर उठी। आर्यन अंदर, हाथ में मोटी फाइल, चेहरा गंभीर। "ये पढ़ो," फाइल बढ़ाई। अनन्या ने खोली – अंकित के केस की डिटेल्स, विटनेस स्टेटमेंट्स, पुलिस रिपोर्ट्स। "तेरा भाई बेकसूर है। कल सुबह जमानत हो जाएगी। मेरे लोग कोर्ट में हैं।" अनन्या की आँखें चमक उठीं, आँसू लुढ़क आए। "थैंक यू... लेकिन क्यों? फ्री में?" आर्यन ने पहली बार करीब आकर कहा, "मेरा भाई भी मरा था। 5 साल पहले। झूठे मर्डर केस में जेल, फिर एनकाउंटर। तेरी फैमिली का कनेक्शन... शायद। प्रूफ ढूँढ रहा हूँ। इसलिए ये शादी। ट्रस्ट टेस्ट।" अनन्या चौंक गई। "मेरी फैमिली? पापा-मम्मी तो गरीब थे। अंकित तो..." आर्यन ने टोका, "समय आएगा। अभी कॉन्ट्रैक्ट फॉलो करो।" कहकर चला गया।अनन्या फाइल पढ़ती रही। अचानक फोन बजा – अंकित! "दीदी, कल सुबह बाहर! जमानत अप्रूव!" अनन्या खुशी से चिल्लाई। लेकिन खुशी अधूरी रही। बाहर गाड़ियों की ब्रेक साउंड, फिर गनशॉट्स! अनन्या बालकनी पर दौड़ी – काले SUV, मास्क्ड मेन, गेट तोड़ रहे। "दुश्मन आ गए!" अनन्या का दिल बैठ गया। आर्यन कहाँ?


एपिसोड 3: पहला हमलासुबह की धूप में अंकित बंगले के गेट पर पहुँचा। जेल की यूनिफॉर्म बदल चुका, साधारण शर्ट-पैंट में। अनन्या दौड़कर गले लग गई। "भैया! तुम सुरक्षित!" अंकित ने कसकर हौला लिया, "दीदी, ये चमत्कार कैसे? कौन मदद की?" अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा, "एक दोस्त... आर्यन ने। लेकिन डिटेल्स बाद में। पहले अंदर आओ।" अंकित अंदर घुसा, बंगले की शान देख हैरान। आर्यन लॉन में खड़ा था, सूरज की रोशनी में उसका चेहरा और सख्त लग रहा। आँखों में आग – शायद रात के मैसेज का असर। अंकित ने हाथ मिलाने को बढ़ाया, लेकिन आर्यन ने इग्नोर किया। "वेलकम। लेकिन सावधान रहना। दुश्मन बाहर हैं।" अंकित चौंका, अनन्या ने बीच में आकर कहा, "भैया, आर्यन अच्छे हैं।"दिन भर फैमिली टाइम। अनन्या ने अंकित को खाना खिलाया, पुरानी बातें कीं। "दीदी, ये बंगला... ये शादी?" अंकित ने धीरे से पूछा। अनन्या ने टाला, "टेम्पररी। भैया को बचाने के लिए।" लेकिन आर्यन सुन रहा था, चुपचाप। शाम को अंकित चला गया, अनन्या को अलविदा कहा। रात ढली, बंगला शांत। लेकिन 11 बजे हंगामा मच गया। गेट पर जोरदार धमाका, लाइट्स बंद, गोलीबारी शुरू। "हमला!" गार्ड्स चिल्लाए। अनन्या कमरे से बाहर निकली, दिल धक्-धक्। आर्यन दौड़ता आया, हाथ में गन। "अंदर रहो!" लेकिन देर हो चुकी – दो गुंडे लिविंग रूम में। एक ने अनन्या की ओर गन तानी। आर्यन ने कूदकर उसे ढेर कर दिया, लेकिन दूसरा गोली चला दी – सीधे आर्यन के कंधे में। खून बहने लगा। "भागो अनन्या!" आर्यन चिल्लाया। अनन्या डरी, लेकिन पहली बार उसके हाथ थामे। दोनों स्टडी रूम में छिपे। बाहर फायरिंग, गार्ड्स जवाब दे रहे। हमलावर चिल्लाए, "राठौर, तेरा बदला पूरा नहीं होगा! तेरा भाई व्यर्थ मरा!"हमला 20 मिनट चला। पुलिस आई, हमलावर भागे। आर्यन को तुरंत अस्पताल ले जाया। अनन्या नर्स बनी बैठी, उसका हाथ थामे। डॉक्टर ने कहा, "बुलेट बाहर, लेकिन रेस्ट चाहिए।" आर्यन को होश आया, अनन्या को देखा। "तुम... सुरक्षित?" ठंडे स्वर में पूछा। अनन्या रोते हुए बोली, "क्यों बचाया मुझे? कॉन्ट्रैक्ट तो..." आर्यन ने मुस्कुराया, "कॉन्ट्रैक्ट है। 6 महीने पूरे होने तक। बीवी का फर्ज।" लेकिन अनन्या ने उसकी आँखों में दर्द देखा – भाई का दर्द। "तुम्हारा भाई कौन था? सच बोलो।" आर्यन चुप। बाहर अंकित आया, "दीदी, आर्यन को सलाम। लेकिन सावधान, ये दुनिया खतरनाक।" अनन्या सोचने लगी – कौन था आर्यन का भाई? और ये बदला किससे?