Kabir अकेला लिविंग हॉल में बैठा था। उसकी आंखों में थकान और मन में बेचैनी थी। बाहर अंधेरा और शांति थी, पर उसके दिल में हलचल थी।
Kabir (धीमे, खुद से सोचते हुए) बोला -
एक साल पहले… सब कुछ अलग था… सब कुछ इतना आसान और साफ़ था… अब देखो… एक ही लड़की… मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका…।
[Flashback: 1 साल पहले – Kabir का Office]
एक साल पहले। Kabir अपने office में Senior Engineer के रूप में काम कर रहा था। Office में हल्की हलचल थी, कंप्यूटर की स्क्रीन की रोशनी में वह काम में व्यस्त था। Shristi उस समय नई आई थी। वह timid और डरपोक थी। जब भी किसी से बात होती, वह डर के मारे पीछे हट जाती। और Kabir से… तो उसका डर और भी ज्यादा था।
Colleague (Office में, मुस्कुराते हुए) बोला -
Shristi, यह Kabir sir हैं। Senior Engineer। मिलो…
Shristi धीरे-धीरे मुड़ी, पर उसके हाथ कांप रहे थे।
Shristi (धीमी आवाज़ में, खुद से फुसफुसाती हुई) बोली -
कबीर sir… मुझे उनसे डर क्यों लग रहा है…?
Kabir ने उस समय notice किया कि Shristi बाकी सब से तो सहज थी, पर उसके सामने उसकी आँखें डर से भरी थीं। Kabir के चेहरे पर एक हल्की गंभीरता और curiosity थी।
Kabir (धीमे, खुद से सोचते हुए) बोला -
ये लड़की… हर किसी से डरती है, पर मुझसे इतना… क्यों? क्या मैं इतना डरावना हूँ या… क्या इसके पीछे कुछ और है?
Shristi धीरे-धीरे अपनी जगह पर बैठ गई, लेकिन Kabir की नजरें उसकी हर हरकत पर टिकी रहीं। उसका डर और उसकी hesitation Kabir को confuse और परेशान कर रही थी।
Present time....
Kabir लिविंग हॉल में बैठे, अपनी आंखें बंद करता है।
Kabir (धीमे, दर्द और regret में) बोला -
एक साल पहले मैं समझ नहीं पाया… अब देखो… वही लड़की… मेरी जिंदगी में सबसे बड़ी उलझन बन गई है। और अब… मुझे खुद पर गुस्सा है… क्यों मैंने उसे दर्द दिया?
Kabir की आंखों में पछतावा और guilt साफ़ झलक रहे थे। वह जानते थे कि उसकी गलतियाँ और उसकी धौंस ने Shristi को नफरत दिलाई थी।
Office – 1 साल पहले
Past Time
Kabir कभी मुस्कुराता नहीं था। उसके चेहरे पर हमेशा गुस्सा और गंभीरता रहती थी। Kabir कभी मुस्कुराता नहीं था। नाक पर गुस्सा बैठा रहता। जैसे-जैसे दिन बीते, Shristi का डर बढ़ता गया। वह उसके नाम से भी डरने लगी थी। Shristi धीरे-धीरे office में हर जगह Kabir से बचती थी। उसके footsteps सुनते ही उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगता। पर किस्मत का क्या करें… हम जिस चीज़ से ज्यादा भागेंगे, वही हमारे और पास आ जाती है। और यही हुआ Shristi के साथ।
एक दिन kabir घर पर काम कर रहा था । चाचा चाची आए। कुछ देर की बातों के बाद.....
चाची बोलीं -
बेटा हमारी उम्र ढल रही है, हम कब तक तक तेरा खयाल रखेंगे?
तू शादी कर ले बेटा।
Kabir ( चिढ़ते हुए ) बोला -
शादी! नहीं मैं नहीं करूंगा। मुझे ये शादी का चक्कर बिल्कुल पसंद नहीं है।
चाचा बोले -
अरे बेटा पर शादी तो सबको करनी पड़ती है।
Kabir बोला -
पर मुझे नहीं करनी शादी चाचा जी।
चाची बोलीं -
बेटा तुझे हमारी कसम कर ले शादी। हमने तेरे मां - बाप से मरने से पहले वादा किया था । और अब हम निभाएंगे। तुझे तेरे मरे हुए
मां - बाप की कसम।
कबीर मजबूर सा हो गया।
Kabir office में अकेला बैठा था। उसे शादी में कोई खास interest नहीं था, न ही किसी लड़की में। लेकिन चाचा-चाची का दबाव और परिवार की उम्मीदें उसे मानने पर मजबूर कर रही थीं।
Kabir (धीमे, खुद से) बोला -
मुझे शादी में कोई interest नहीं… पर चाचा-चाची ने इतना दबाव बनाया कि मैं ना नहीं कह सका।
Shristi के घर वाले भी उस शादी को ज़बरदस्ती करवा रहे थे। दबाव के आगे Shristi को भी मानना पड़ा।
Shristi के घर वाले भी Kabir से शादी के लिए दबाव बना रहे थे। Shristi ने भी हाँ कर दी। पर shristi को नहीं पता उसका दूल्हा कौन था। क्योंकि Shristi को लड़के का photo देखने के लिए दिया गया, पर उसने उसे देखा ही नहीं। Kabir ने भी लड़की का photo देखा ही नहीं; उन्होंने बस photo अपनी almari में रख दी।
ना Kabir ने लड़की का photo देखा… ना Shristi ने । बस photo अलमारी में रह गई। और शायद यही दोनों की ज़िंदगी की सबसे बड़ी चूक थी। किसे पता था कि सिर्फ़ एक photo न देखना, दोनों की ज़िंदगी में इतने ज़ख्म छोड़ देगा… और प्यार की बजाय नफरत और डर की शुरुआत करेगा।
Shadi भी हो गई थी। मंडप में सब rituals पूरे हो चुके थे। Shristi घूंघट में पूरी तरह ढकी हुई थी। उसके चेहरे का कोई हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा था। Kabir के दिल में उस दुल्हन के लिए सिर्फ़ नफरत भरी हुई थी। प्यार या खुशी की जगह सिर्फ़ गुस्सा और घृणा थी। वह सोच भी नहीं सकता था कि यही लड़की उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका बनेगी। Kabir ने घूंघट के पीछे छुपी दुल्हन को नहीं देखा, पर उसका दिल किसी भी तरह से खुश नहीं हुआ। उसके अंदर सिर्फ़ तिरस्कार और नफरत थी।
Present Time – Bedroom
Kabir अब Bedroom के बाहर बैठा था। उसके विचार फिर से past में घूम रहे थे। तभी bedroom का gate खुला।
Shristi (उखड़ी आवाज़ में, थोड़ी शर्म और concern के साथ) बोली -
बाहर मत सोइए… ठंड लग जाएगी… अंदर आ जाइए।
Kabir ने चुपचाप सिर हिलाया और बिना किसी शब्द के उसके साथ Bedroom में चला गया।
Shristi पहले चुपचाप बिस्तर पर लेटी हुई थी। पहले वह उसके सीने की गर्माहट में सोती थी। लेकिन आज…दोनों अब एक ही bed पर थे, लेकिन बीच में दूरी बनी हुई थी। Shristi दूर और शांत, Kabir भी एक तरफ बैठा हुआ, उसकी आंखों में guilt और regret झलक रहा था।
Shristi (धीमी आवाज़ में, अपने अंदर) बोली -
आज… हम एक ही bed पर हैं… पर फिर भी… इतनी दूरी… बस आपकी वजह से?
Kabir भी चुप था। वह सोच रहा था कि कैसे उसे पास लाया जाए, लेकिन Shristi के डर और नफरत की दीवार तोड़ना इतना आसान नहीं था। पहली बार Shristi ने महसूस किया कि एक ही जगह पर होना और भी डरावना हो सकता है। और Kabir भी समझ रहा था कि उसके अंदर के गुस्से और पछतावे के बीच, अब धीरे-धीरे उसे Shristi का भरोसा जीतना होगा।
To Be Continued…
Shristi Kabir से इतनी दूरी क्यों बनाए हुए थी – डर, नफरत या पुरानी चोट का असर? क्या हुआ था past में ?
Kabir की past hatred और present guilt के बीच कैसे संतुलन बनेगा?
क्या Kabir धीरे-धीरे Shristi का भरोसा जीत पाएगा?
Shristi और Kabir के बीच की emotional tension अगले अध्याय में कैसे बढ़ेगी?
क्या ये दोनों पहले private dialogue में अपनी नफरत और misunderstanding के बारे में खुलकर बात करेंगे?
Aapko kya lagta hai -
Hero sahi hai ya galat? A ya B likh kar jao.”
“shristi ko Maaf karna chahiye ya nahi?
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Kyunki main daily update karti hoon.
Or Jo log yahan tak padh chuke hain aur chup ho… ek ❤️ drop karke jao. Main dekhna chahti hoon kitne silent readers hain.