Valentine- day , ek adhuri suruaat 4 in Hindi Love Stories by vikram kori books and stories PDF | वेलेंटाइन- डे, एक अधूरी शुरुआत ‎- 4

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वेलेंटाइन- डे, एक अधूरी शुरुआत ‎- 4

‎Part- 4

‎सुहानी ने लैपटॉप खोला।

‎‎स्क्रीन पर मीटिंग इनवाइट पहले से खुला था।

‎समय में अभी पाँच मिनट बाकी थे,

‎लेकिन उसका दिल जैसे पहले ही लॉग-इन हो चुका था।

‎वह जानती थी—

‎यह सिर्फ़ एक प्रोफेशनल मीटिंग नहीं है।

‎यह पहली बार होगा

‎जब हर्ष उसे सामने से देखेगा,

‎बिना कैफ़े की भीड़ के,

‎बिना इत्तेफ़ाक़ की आड़ के।

‎उसने बाल ठीक किए।

‎कैमरा ऑन किया, फिर तुरंत ऑफ।

‎“मैं इतना नर्वस क्यों हो रही हूँ?”

‎“वह सिर्फ़ एक को-वर्कर है।”

‎उधर हर्ष अपने कमरे में बैठा था।

‎पीछे दीवार पर सादा सा शेल्फ,

‎पास में कॉफी का मग।

‎उसने लैपटॉप स्क्रीन को देखा।

‎मीटिंग शुरू होने में दो मिनट।

‎उसने कभी किसी क्लाइंट कॉल से पहले

‎इतना नहीं सोचा था

‎कि कैमरा किस एंगल से ठीक लगेगा।

‎वर्क फ्रॉम होम

‎आज कुछ ज़्यादा ही पर्सनल लग रहा था।

‎मीटिंग शुरू हुई।

‎सुहानी joined the meeting.

‎हर्ष की साँस हल्की सी अटक गई।

‎स्क्रीन पर सुहानी थी—

‎बिल्कुल वैसी नहीं

‎जैसी कैफ़े में दिखी थी।

‎आज वह ज़्यादा प्रोफेशनल थी,

‎लेकिन आँखों में वही पुरानी थकान।

‎ पहले सुहानी ने कहा।

‎“हैलो,”

‎हर्ष ने जवाब दिया।

‎“हैलो,”

‎दोनों कुछ सेकंड चुप रहे।

‎वह चुप्पी

‎अजीब तरह से भारी थी।

‎“तो…,”

‎हर्ष ने मीटिंग एजेंडा खोलते हुए कहा,

‎“क्लाइंट को डैशबोर्ड में कुछ बदलाव चाहिए।”

‎सुहानी ने सिर हिलाया।

‎“हाँ, मैंने मेल पढ़ लिया है।”

‎काम की बातें शुरू हुईं।

‎डेटा।

‎डेडलाइन।

‎डिलिवरेबल्स।

‎दोनों पूरी तरह प्रोफेशनल।

‎लेकिन बीच-बीच में

‎नज़रें स्क्रीन से हटकर

‎सीधे एक-दूसरे पर चली जातीं।

‎और फिर तुरंत वापस।

‎मीटिंग लगभग खत्म होने वाली थी

‎कि अचानक सुहानी का इंटरनेट थोड़ा स्लो हो गया।

‎उसकी आवाज़ अटकने लगी।

‎“हर्ष… मेरी आवाज़… आ रही है?”

‎“हाँ… अभी आ रही है,”

‎हर्ष ने कहा।

‎फिर स्क्रीन फ्रीज़ हो गई।

‎सुहानी की तस्वीर वहीं रुक गई—

‎आँखें थोड़ी झुकी हुई,

‎जैसे वह कुछ कहना चाहती हो

‎लेकिन शब्द अटके हों।

‎हर्ष स्क्रीन को देखता रह गया।

‎कुछ सेकंड बाद

‎कनेक्शन वापस आया।

‎“सॉरी,”

‎सुहानी ने कहा।

‎“नेट की दिक्कत।”

‎“कोई बात नहीं,”

‎फिर अचानक उसने कहा—

‎“अगर बुरा न लगे तो…”

‎सुहानी ने कैमरे की ओर देखा।

‎“हाँ?”

‎“मीटिंग के बाद…

‎एक मिनट रुक सकती हो?”

‎सुहानी का दिल तेज़ हो गया।

‎“काम के लिए?”

‎उसने पूछा।

‎हर्ष हल्का सा मुस्कराया।

‎“शायद… खुद के लिए।”

‎मीटिंग खत्म हुई।

‎क्लाइंट लॉग-आउट हो गया।

‎अब स्क्रीन पर

‎सिर्फ़ दो लोग थे।

‎और बीच में

‎बहुत कुछ अनकहा।

‎“मैं जानता हूँ,”

‎हर्ष ने धीरे से कहा,

‎“आप ज़्यादा सवाल पसंद नहीं करतीं।”

‎सुहानी चुप रही।

‎“और मैं यह भी जानता हूँ,”

‎“कि हर बार चुप रहना

‎मदद नहीं करता।”

‎सुहानी ने स्क्रीन से नज़र हटाई।

‎“कुछ खामोशियाँ ज़रूरी होती हैं।”

‎“लेकिन हर खामोशी सुरक्षित नहीं होती,”

‎हर्ष ने कहा।

‎यह पहली बार था

‎जब उसने इतना साफ़ बोला।

‎“आप मुझसे क्या चाहते हैं?”

‎सुहानी ने सीधे पूछा।

‎हर्ष ने बिना रुके जवाब दिया—

‎“ईमानदारी।”

‎सुहानी हँसी नहीं।

‎रोई भी नहीं।

‎बस बोली—

‎“और अगर मेरी ईमानदारी

‎तुम्हें पसंद न आए?”

‎“तो भी मैं सुनूँगा,”

‎हर्ष ने कहा।

‎“क्योंकि अधूरी बातें

‎ज़्यादा नुकसान करती हैं।”

‎सुहानी ने गहरी साँस ली।

‎“मैं वेलेंटाइन से इसलिए डरती हूँ,”

‎उसने कहा,

‎“क्योंकि उस दिन

‎मुझे छोड़ दिया गया था…

‎बिना किसी सफ़ाई के।”

‎हर्ष कुछ नहीं बोला।

‎“और तब से,”

‎उसकी आवाज़ धीमी हो गई,

‎“जो भी थोड़ा पास आता है,

‎मुझे लगता है—

‎वह भी चला जाएगा।”

‎स्क्रीन के उस पार

‎हर्ष की आँखें नम हो गईं।

‎“मैं जा सकता हूँ,”

‎उसने कहा,

‎“लेकिन बिना बताए नहीं।”

‎यह जवाब सुहानी ने एक्सपेक्ट नहीं किया था।

‎कुछ पल बाद

‎सुहानी ने मीटिंग एंड कर दी।

‎बिना अलविदा।

‎हर्ष वहीं बैठा रहा।

‎स्क्रीन काली हो गई थी,

‎लेकिन शब्द अब भी गूंज रहे थे।

‎रात को सुहानी के मोबाइल पर

‎एक voice note आया।

‎हर्ष का।

‎उसने प्ले नहीं किया।

‎मोबाइल साइड में रख दिया।

‎और छत को देखते हुए सोचा—

‎अगर मैंने इसे सुन लिया,

‎तो शायद मैं फिर खुद को रोक नहीं पाऊँगी।

‎अगली सुबह,

‎सुहानी ने देखा—

‎Voice note: Seen ✔✔ (2:14 AM)

‎लेकिन उसे याद नहीं था

‎कि उसने कभी वह voice note सुना हो।

‎और उसी पल,

‎हर्ष के मोबाइल पर

‎सुहानी का एक छोटा सा मैसेज आया—

‎“अगर किसी आवाज़ से

‎दिल काँप जाए…

‎तो क्या उसे सुनना ज़रूरी होता है?”

‎यह सवाल

‎सिर्फ़ हर्ष से नहीं था…

‎यह सुहानी का

‎खुद से पहला सामना था।

‎ आगे जानने के लिए हमारे साथ बने रहिए ।

‎By..............Vikram kori              ..