valentine- day ek adhuri suruaat 3 in Hindi Love Stories by vikram kori books and stories PDF | वेलेंटाइन- डे, एक अधूरी शुरुआत ‎- 3

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वेलेंटाइन- डे, एक अधूरी शुरुआत ‎- 3


‎ part -3

‎सुहानी मोबाइल को देखे जा रही थी।

‎स्क्रीन पर वही शब्द रुके हुए थे—

‎“Harsh is typing…”

‎उसने एक पल के लिए आँखें बंद कर लीं।

‎जैसे उस एक लाइन में सिर्फ़ कोई मैसेज नहीं,

‎बल्कि बहुत कुछ छुपा हो।

‎उसने खुद से सवाल किया।

‎“मैं इसे इतना सीरियस क्यों ले रही हूँ?”

‎मैसेज आया।

‎हर्ष:

‎“शायद अचानक मैसेज करना अजीब लगे…

‎लेकिन कल अच्छा लगा आपसे बात करके।”

‎सुहानी ने पढ़ा।

‎ ब्लू टिक नहीं गया।

‎उसने मोबाइल उल्टा रख दिया।

‎हर्ष कुर्सी पर पीछे टिक गया।

‎मैसेज सेंड हो चुका था।

‎अब कुछ भी उसके हाथ में नहीं था।

‎वर्क डैशबोर्ड खुला था—

‎टास्क्स, डेडलाइन्स, मीटिंग्स।

‎लेकिन दिमाग़ वहीं अटका था—

‎seen होगा या नहीं?

‎वर्क फ्रॉम होम में सबसे मुश्किल यही होता है—

‎आप काम से भाग नहीं सकते,

‎और दिमाग़ से भी नहीं।

‎दोपहर तक सुहानी ने रिप्लाई नहीं किया।

‎उसका मोबाइल साइलेंट पर था,

‎लेकिन उसका दिल नहीं।

‎वह बालकनी में खड़ी थी।

‎नीचे सड़क पर लोग आ-जा रहे थे—

‎कोई हँसता हुआ, कोई फोन पर लड़ता हुआ,

‎कोई हाथों में गुलाब लिए।

‎वेलेंटाइन वीक शुरू हो चुका था।

‎उसके सीने में हल्का सा दबाव महसूस हुआ।

‎“हर साल यही होता है,”

‎उसने खुद से कहा।

‎“और हर साल मैं खुद से वादा करती हूँ—

‎इस बार नहीं।”

‎मोबाइल फिर उठा लिया।

‎मैसेज अब भी वहीं था।

‎उसने टाइप किया।

‎“हाँ… मुझे भी।”

‎बस इतना।

‎भेज दिया।

‎हर्ष के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।

‎छोटी सी जीत।

‎लेकिन उसके लिए काफी।

‎उसने जवाब नहीं दिया।

‎जानबूझकर।

‎कुछ रिश्ते जल्दी में नहीं बनने चाहिए—

‎यह बात वह जानता था।

‎अगले कुछ दिन

‎मैसेज छोटे रहे।

‎कॉफी।

‎मौसम।

‎काम।

‎कोई गहराई नहीं,

‎कोई सवाल नहीं।

‎लेकिन हर मैसेज के पीछे

‎कुछ अधूरा सा छुपा रहता।

‎सुहानी जानती थी—

‎अगर उसने थोड़ा भी ढील दी,

‎तो वह फिर उसी जगह पहुँच जाएगी

‎जहाँ से निकलने में उसे सालों लगे थे।

‎एक शाम।

‎सुहानी ऑफिस से लौटी थी।

‎थकी हुई।

‎मोबाइल देखा।

‎हर्ष:

‎“अगर बुरा न लगे तो एक सवाल पूछूँ?”

‎उसने देर तक मैसेज देखा।

‎फिर टाइप किया।

‎“पूछो।”

‎कुछ सेकंड बाद—

‎“आप वेलेंटाइन से डरती क्यों हैं?”

‎सुहानी की उँगलियाँ रुक गईं।

‎यही तो वह सवाल था

‎जिससे वह भागती आई थी।

‎वह सोफे पर बैठ गई।

‎आँखें बंद कीं।

‎यादें बिना इजाज़त लौट आईं।

‎तीन साल पहले।

‎वही 14 फरवरी।

‎फोन लगातार बज रहा था।

‎लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।

‎मैसेज—

‎“मैं रास्ते में हूँ।”

‎फिर—

‎“थोड़ा लेट हो जाऊँगा।”

‎और आख़िर में—

‎एक लंबा सा टेक्स्ट।

‎“मुझे लगता है हम एक-दूसरे के लिए सही नहीं हैं।”

‎बस।

‎उस दिन न गुलाब मिला,

‎न जवाब।

‎सिर्फ़ एक एहसास—

‎कि भरोसा भी टूट सकता है।

‎सुहानी की आँखें खुल गईं।

‎मोबाइल अभी भी हाथ में था।

‎हर्ष का नाम स्क्रीन पर चमक रहा था।

‎उसने टाइप किया।

‎“कुछ चीज़ें याद दिलाती हैं

‎कि हर वादा पूरा नहीं होता।”

‎हर्ष ने पढ़ा।

‎रिप्लाई नहीं किया।

‎सीधे कॉल किया।

‎सुहानी घबरा गई।

‎कॉल कट कर दी।

‎कुछ सेकंड बाद—

‎हर्ष:

‎“सॉरी। कॉल नहीं करना चाहिए था।

‎आप जब चाहें, तब बात करेंगे।”

‎उस एक मैसेज में

‎कोई ज़ोर नहीं था।

‎और शायद यही बात

‎सुहानी को सबसे ज़्यादा चुभी।

‎रात देर तक वह सो नहीं पाई।

‎दिमाग़ में बार-बार एक ही सवाल—

‎क्या हर शांत इंसान सुरक्षित होता है?

‎अगले दिन।

‎सुहानी को एक मेल आया।

‎सब्जेक्ट लाइन पढ़कर वह चौंक गई।

‎“Client Review – Immediate Attention Required”

‎और नीचे—

‎CC में हर्ष का नाम।

‎वही हर्ष।

‎उसे पहली बार एहसास हुआ—

‎यह सिर्फ़ एक कैफ़े की मुलाक़ात नहीं थी।

‎उनकी ज़िंदगियाँ

‎एक ही प्रोफेशनल दुनिया में

‎आपस में टकरा रही थीं।

‎हर्ष ने भी मेल देखा।

‎सुहानी का नाम।

‎उसने स्क्रीन को घूरते हुए सोचा—

‎कुछ लोग धीरे-धीरे ज़िंदगी में नहीं आते…

‎वो अचानक हर जगह दिखने लगते हैं।

‎शाम को सुहानी का मैसेज आया।

‎“लगता है हम प्रोफेशनली भी जुड़े हैं।”

‎हर्ष ने जवाब दिया।

‎“शायद… और शायद यही इत्तेफ़ाक़

‎हमें बार-बार मिलवा रहा है।”

‎सुहानी ने रिप्लाई नहीं किया।

‎उसने मोबाइल साइड में रखा।

‎डर फिर लौट आया था।

‎अगली सुबह,

‎सुहानी के मेलबॉक्स में एक नया नोटिफ़िकेशन आया—‎

‎“Client has requested a joint virtual meeting.”

‎और मीटिंग इनवाइट में

‎सिर्फ़ दो नाम थे—

‎सुहानी और हर्ष।

‎‎वह नहीं जानती थी

‎कि यह मीटिंग

‎सिर्फ़ काम के लिए नहीं है…

‎यह उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी

‎और हर्ष की सबसे बड़ी सच्चाई

‎दोनों को सामने ले आने वाली है।

‎ आगे जानने के लिए हमारे साथ बने रहिए ।। 

‎By.........Vikram kori.               ..