एपिसोड 6 — "महायुद्ध की शुरुआत और एक चौंकाने वाला सच"
K-452b ग्रह की धरती धमाकों से दहल रही थी। आसमान में दुश्मन के जहाज टिड्डियों की तरह मंडरा रहे थे।
सिया ने गुस्से में उस तरफ देखा जहाँ उसे वह 'काली परछाई' महसूस हो रही थी। उसने अपने नाना से पूछा, "क्या वह आ गया है? वही जिसने पृथ्वी पर मुझ पर हमला किया था?"
सुप्रीम यास्किन ने सिर हिलाया, "नहीं सिया। वह पृथ्वी पर जो दिखा था, वह महज उसका एक होलोग्राम (छलावा) था। असली दुश्मन यहाँ नहीं आएगा। वह 'शून्य क्षेत्र' (The Dark Void) में छिपा बैठा है—ब्रह्मांड का वह कोना जहाँ न तारे हैं, न रोशनी, बस गहरा अंधेरा है। उसने अपने सेनापति और गुलामों को युद्ध के लिए भेजा है।"
तभी एक और धमाका हुआ। यास्किन ने चिल्लाकर कहा, "बातें बाद में! पहले हमें हथियारों की ज़रुरत है। मेरे पीछे आओ!"
वे लोग महल के गुप्त तहखाने की ओर भागे। जैसे ही भारी दरवाज़ा खुला, सबकी आँखें फटी रह गईं। वह 'शाही शस्त्रागार' (Royal Armory) था। वहां हवा में तैरते हुए आधुनिक हथियार और ऐसे सूट (कवच) रखे थे जो किसी भी इंसान को महामानव बना दें।
"जल्दी करो! अपनी पसंद का कवच चुन लो," यास्किन ने आदेश दिया।
सिया के अंकल की नज़र एक कोने में रखे एक विशेष सूट पर पड़ी। वह काले और सफेद रंग का एक भारी-भरकम और रोबोटिक सूट था।
"क्या मैं यह ले सकता हूँ?" अंकल ने पूछा।
यास्किन मुस्कुराए, "तुम्हारी पसंद अच्छी है। यह 'टाइटन-X' है। इसे पहनने वाला एक पूरी सेना के बराबर होता है।"
अंकल ने जैसे ही वह सूट पहना, उनकी ताकत कई गुना बढ़ गई। उन्हें लगा जैसे वे पहाड़ भी उठा सकते हैं।
दूसरी तरफ, रिया भी एक हथियार उठाने के लिए आगे बढ़ी, लेकिन सिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"नहीं रिया!" सिया की आवाज़ में एक भाई की चिंता थी। "तुम इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लोगी। यह बहुत खतरनाक है। तुम यहीं रुको।"
रिया बहस करना चाहती थी, लेकिन सिया की आँखों में देख वह रुक गई।
"और तुम, सिया..." यास्किन ने कहा, "तुम्हें चुनने की ज़रुरत नहीं है। कवच तुम्हें खुद चुनेगा।"
तभी कमरे के बीच में रखा एक लिक्विड (तरल) धातु जैसा पदार्थ हवा में उड़ा और सीधे सिया की ओर आया। इससे पहले कि सिया कुछ समझ पाता, वह पदार्थ उसके शरीर पर चिपक गया और एक बेहद एडवांस्ड और शक्तिशाली नैनो-सूट में बदल गया। सिया को लगा जैसे उसके नसों में बिजली दौड़ गई हो।
"चलिए, इन्हें खत्म करते हैं!" सिया ने हुंकार भरी।
जैसे ही वे बाहर निकले, युद्ध का मैदान सज चुका था। सिया और अंकल, दोनों किसी तूफ़ान की तरह दुश्मनों पर टूट पड़े। अंकल के एक मुक्के से दुश्मन के रोबोट हवा में उड़ जाते, और सिया की रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि दुश्मन उसे देख भी नहीं पा रहे थे।
दुश्मन की सेना का नेतृत्व एक क्रूर कमांडर कर रहा था, जिसका नाम 'कार्य' (Karya) था। वह एक ऊंचे टीले से चिल्लाकर सैनिकों को आदेश दे रहा था।
सिया की नज़र सीधे 'कार्य' पर पड़ी। उसने अंकल को इशारा किया और दोनों ने अपनी दिशा बदल दी। वे सीधे सेनापति की तरफ लपके।
'कार्य' ने देखा कि दो योद्धा उसकी तरफ आ रहे हैं। लेकिन जैसे ही उसकी नज़र सिया के सूट और उसकी चमकती नीली आँखों पर पड़ी, उसका चेहरा पीला पड़ गया। उसे वह पुरानी भविष्यवाणी याद आ गई— "एक मिश्रित रक्त (Hybrid) ही अंधेरे का अंत करेगा।"
"यह... यह तो वही है!" कार्य के होंठ कांपने लगे। "भविष्यवाणी सच हो गई... यह मुझे मार डालेगा!"
मौत के डर से कार्य ने अपनी तलवार फेंक दी और पीछे मुड़कर भागने लगा।
"रोको उन्हें! उसे मार डालो!" कार्य चिल्लाते हुए अपने सैनिकों के पीछे छिपने की कोशिश करने लगा।
सैनिक सिया को रोकने आए, लेकिन सिया ने हवा में छलांग लगाई और सीधे कार्य के सामने जा खड़ा हुआ। पीछे से अंकल ने रास्ता ब्लॉक कर दिया। कार्य अब घिर चुका था।
सिया ने उसका गला पकड़ा और हवा में उठा दिया।
"अपने मालिक के बारे में बताओ! वह 'परछाई' कहाँ छिपी है?" सिया ने दहाड़ लगाई।
कार्य, जो अभी तक कांप रहा था, अचानक एक अजीब सी हंसी हंसने लगा।
"मूर्ख लड़के... तुम मुझे मार सकते हो, पर उसे नहीं। मैं अपने मालिक का वफादार हूँ, जुबान नहीं खोलूंगा।"
सिया ने अपनी पकड़ मज़बूत की, "तो फिर मरने के लिए तैयार हो जा।"
"रुको!" कार्य का सांस घुटने लगा। "मैं... मैं तुम्हें अंधेरे के बारे में नहीं... पर तुम्हारे फायदे की एक बात बता सकता हूँ।"
सिया रुका। "क्या?"
कार्य ने सिया की आँखों में देखा और वह राज़ खोला जिसने युद्ध के शोर को सन्नाटे में बदल दिया।
"तुम्हें लगता है तुम अनाथ हो? तुम्हें बताया गया कि तुम्हारे माता-पिता मर चुके हैं?" कार्य ने कुटिल मुस्कान के साथ कहा।
"वे ज़िंदा हैं, सिया। तुम्हारे माता-पिता ज़िंदा हैं और हमारे ही कैदखाने में तड़प रहे हैं!"
सिया के हाथों की पकड़ ढीली पड़ गई। उसे अपनी कानों पर विश्वास नहीं हुआ। उसने झटके से पीछे मुड़कर अपने नाना यास्किन की तरफ देखा, जो दूर खड़े थे।
कहानी में नया मोड़:
क्या सिया के माता-पिता सचमुच ज़िंदा हैं? या यह कार्य की कोई चाल है?
अगर वे ज़िंदा हैं, तो नाना यास्किन ने सिया से झूठ क्यों बोला कि वे मर चुके हैं?
क्या वह 'काली परछाई' और कोई नहीं, बल्कि सिया का कोई अपना ही है?
इन रहस्यों से पर्दा उठेगा अगले भाग में।
लेखक
सुरेश सौंधिया